वहां वह हैरत में पड़ गई और चारों और नजर दौड़ाने के बाद कहा कि यहां न तो चिड़ियों की चहचहाहट सुनाई दे रही है और न ही बांध के आसपास कोई पशु दिखाई दे रहे हैं। यहां कई महिलाओं ने उनसे बीमारियों का जिक्र भी किया। बाद में वहां से जैतपुर सभा स्थल पर पहुंचीं।
यहां विद्यार्थियों ने बच्चा बच्चा कहता है बांडी हमारी माता है..नारे लगी तख्तियों से स्वागत किया। शायद यह नारे उनके मन को छू गए इसलिए इसका जिक्र उन्होंने अपने संबोधन में भी किया और हर संभव सहयोग व समाधान का भरोसा दिया।
जैतपुर में सभा : मैं यहां रहती तो डर ही जाती
जैतपुर में आयोजित सभा में उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक हालातों में सभी लड़ाइयों की जड़ पानी भी एक कारण है। मेरी सासू मां इंदिराजी को गोली लगने के कई कारणों में से एक वजह जल समस्या भी थी।
कहीं न कहीं पंजाब व हरियाणा के बीच जल विवाद से शुरूआत हुई थी। मेनका ने कहा कि मैं तो यहां रहती तो डर जाती। पानी की हर बूंद पूजा के समान है पर यहां पानी का प्रदूषण किसी पाप से कम नहीं।
मेरे संसदीय क्षेत्र आंवला व बडौदा में हो रहे प्रदूषण से इसकी तुलनाकी जा सकती है। मैं यह मानती हूं कि केरल व तमिलनाडु के बीच स्थित मुलापेरियार बांध को लेकर मामला गंभीर हो सकता है, तो नेहड़ा बांध को लेकर भी समाधान के प्रयास तो हो सकते हैं।
जिस देश में बीमारों की संख्या बढ़ती जा रही है वहां सेहत व बच्चों के भविष्य के लिए प्रदूषण निवारण के प्रयास जरूरी है। पाली में भी यदि एक अन्ना हजारे हो जाए तो काफी प्रयास सार्थक हो सकते हैं। जैतपुर में यह लड़ाई कुछ इस तरह शुरू करें कि तीन दिन तक खाना नहीं खाए। मैं भी आपके साथ हूं, इसका कुछ तो समाधान निकलेगा ही।
मेरी नजर में पानी खत्म करने वाले व नदी को बर्बाद करने वाले बहुत ही घातक कार्य कर रहे हैं। मैं इस संदर्भ में राज्य के मुख्यमंत्री को पत्र लिखूंगी, वसुंधराराजे को भी सभी तथ्यों से अवगत करवाऊंगी।
मुख्यमंत्री से यह भी कहूंगी कि जब मैं उत्तर प्रदेश से यहां आ सकती हूं तो वे भी आकर इस समस्या की गंभीरता को क्यों नहीं नापते? इस दौरान राज्य सरकार के पूर्व पर्यावरण मंत्री लक्ष्मीनारायण दवे ने मारवाड़ी भाषा में समस्या को बताया। कार्यक्रम में किसान पर्यावरण संघर्ष समिति के महामंत्री महावीरसिंह सुकरलाई ने कहा कि किसानों के सब्र की परीक्षा मत लो।
उन्होंने उपस्थित लोगों को आह्वान किया कि जब आप सभी संकल्प पत्र भरोगे कि जब तक समस्या का समाधान नहीं हो जाता तब तक हम आंदोलन करते रहेंगे तब ही हम आंदोलन की शुरूआत करेंगे। कार्यक्रम में किसान पर्यावरण संघर्ष समिति के अध्यक्ष पुखराज पटेल, उपाध्यक्ष गंगादान चारण, अमराराम पटेल, गिरधारीराम पटेल, पीराराम पटेल, सरपंच उर्मिला, अर्जुनसिंह, संत चंपापुरी महाराज, सूरजनदास महाराज समेत कई लोग उपस्थित थे।
भास्कर से बातचीत : घर में नहीं होती राजनीति की बात
भाजपा सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि उनकी पुत्रवधु यामिनी उत्तरप्रदेश के चुनाव में भाग नहीं लेंगी। नेहड़ा बांध के अवलोकन के बाद एक सवाल के जवाब में उन्होंने भास्कर को बताया कि यामिनी एक कलाकार मना व्यक्तित्व है, उनकी राजनीति में फिलहाल रुचि नहीं है।
घर में चर्चा में भी राजनीति संबंधी बातचीत नहीं होती। मेनका ने उत्तरप्रदेश चुनाव के सवाल पर कहा कि वहां के चुनाव परिणाम केंद्र के चुनावों का आइना नहीं हो सकते। देश के विभिन्न राज्यों में चुनाव के मुद्दे अलग अलग होते हैं।
उत्तरप्रदेश से शुरू हुई यह लड़ाई लंबी अधिक है। वहां के हालात इतने खराब है कि केबिनेट के कई मंत्रियों को भ्रष्टाचार के कथित आरोप में निकाला गया है। बेरोजगारी बेहिसाब है, विधवाओं को पेंशन तक में परेशानियां उठानी पड़ रही है। ऐसे में यह चुनाव कई मायनों में राजनीति की नई तस्वीर पेश करेंगे।
प्रदूषण को उन्होंने पर्यावरणीय आंतकवाद की संज्ञा दी। स्वीडन सहित कई उदाहरणों से उन्होंने नवीनतम तकनीकी समाधान के रास्ते भी सुझाए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बूंद बूंद पानी के लिए लड़ाई होती है। ऐसे में प्रदूषण को नहीं झेला जाएगा।