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एक सिगरेट से आठ सैकंड कम होती है जिंदगी

Matrix News | Apr 17, 2012, 01:09AM IST
 
 

भास्कर न्यूज त्न सिरोही
सिगरेट फूंकने वाले लोग यह नहीं जानते कि सिगरेट खुद उन्हें पी रही है। आप जब सिगरेट के कश लगाते हैं तो सिगरेट छोटी होती जाती है, लेकिन यह प्रत्यक्ष रूप से दिखने के बावजूद सच नहीं है। सिगरेट आपकी जिंदगी छोटी कर रही है। एक सिगरेट आपकी जिंदगी के आठ सैकंड कम कर देती है। यदि आप दिन में सिगरेट का एक पैकेट पीते हैं तो वह आपके जीवन के शेष त्न पेज 12
अस्सी सैकंड कम कर देती है, यानी एक वर्ष में आपकी जिंदगी के करीब 12 दिन सिगरेट कम कर रही है। यह कहना है जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. प्रदीप चौहान का। भास्कर के इस अभियान से हमें सीख लेते हुए नशामुक्ति का संकल्प लेना चाहिए और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं एवं निम्न वर्ग के लोग धूम्रपान अधिक करते हैं, उन्हें जागरूक होने की जरूरत है।
तामसिक वृत्ति के लोग करते है नशा
गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि प्रत्येक मनुष्य में तीन प्रकार की वृत्तियां पाई जाती हैं- तामसिक, राजसिक एवं सात्विक। इन तीनों वृत्तियों में से जिस वृत्ति की प्रधानता मनुष्य में पाई जाती है, उस मनुष्य का खान-पान एवं आचरण उसी के अनुरूप होता है। तामसिक वृत्ति की प्रधानता वाले मनुष्यों में अंदर से नशे की आवश्यकता होती है व मांग के कारण ही नशे से होने वाली हानियों के बावजूद मनुष्य नशा करता है।
आप भी आएं आगे
दैनिक भास्कर के एंटी टोबेको मिशन को पाठकों का जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। पाठक एसएमएस व फोन पर अपनी भावनाएं हमें बता रहे हैं तथा इस पहल को वर्तमान की पहली जरूरत बता रहे हैं। अभियान के तहत प्रकाशित इस स्टोरी के संबंध में अपनी राय व स्लोगन हमें मोबाइल नं. 9672988898 पर एसएमएस के जरिए अवश्य दें।
हम भी भास्कर के साथ
॥किसी भी धर्म में नशे को जगह नहीं दी गई है। नशे से व्यक्ति का शारीरिक, मानसिक व आर्थिक नुकसान होता है। नशे की गिरफ्त में फंसे व्यक्ति का अंत निकट रहता है। नशे की लत वाला व्यक्ति न केवल खुद का, बल्कि अपने परिवार का भी नुकसान करता है। खासतौर पर परिवार के बड़े-बुजुर्गों को नशे से दूर रहना चाहिए, तभी युवा पीढ़ी को वह सही राह दिखा सकेंगे। धर्म गुरुओं को भी नशे से दूर रहने की शिक्षा देनी चाहिए। ञ्जञ्ज
-गादीपति सत्यानंद महाराज, रवि धाम आश्रम, गुजरात
॥मैंने आज दिन तक किसी भी तरह का नशा नहीं किया है और न ही मेरे परिवार को कोई नशा करता है। नशे को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक रीति-रिवाज व परंपराएं भी जिम्मेदार हैं। शादी-ब्याह, कर्मकांड व धार्मिक आयोजनों में बीड़ी, तंबाकू, सिगरेट, शराब, अफीम, गांजा को प्राथमिकता दी जाती है। समाज को सही दिशा में ले जाने के लिए सामाजिक बुराइयों को त्यागना होगा। ञ्जञ्ज
-भरत कोली, सरपंच, गुंदवाड़ा
॥किसी भी समाज में नशा करने वाले व्यक्ति का सम्मान नहीं होता है। नशा करने वाले व्यक्ति के घर में शांति का वास नहीं होता है। दैनिक भास्कर का एंटी टोबेको मिशन सराहनीय कदम है। लोगों को इससे बचाने के लिए ऐसे सामाजिक सरोकार वाले अभियान चलाकर जागरूक किया जाना चाहिए, जिससे उन्हें पता चल सके कि धूम्रपान एवं तंबाकू से क्या-क्या नुकसान है। इससे होने वाले रोग उम्रभर आदमी का पीछा नहीं छोड़ते। तंबाकू सेवन से पाचन क्रिया पर बुरा प्रभाव पड़ता है। ञ्जञ्ज
-मोहम्मद बोहरा, मंडार
 
 
 

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