Home » Rajasthan » Dungarpur » दृष्टिहीन कुलदीप ने 12 घंटों तक तबला वादन किया

दृष्टिहीन कुलदीप ने 12 घंटों तक तबला वादन किया

भीलूड़ा | Apr 18, 2012, 01:42AM IST
इरादे बुलंद हो तो मुश्किलें रुकावट नहीं बनती कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया है जिले के पादरड़ी बड़ी निवासी कुलदीप जोशी ने।
जिसने दृष्टिहीन होकर भी अपनी पढ़ाई के लिए उत्तरप्रदेश के चित्रकूट तक का सफर किया और वहां पर पढ़ाई में गोल्ड मेडल पाया । जोशी ने गिनीज बुक तक अपना नाम पहुंचाने के लिए 12 घंटों तक तबला वादन किया। भारत में पहली बार किसी विकलांग ने इतनी देर तक तबला वादन किया है। उत्तरप्रदेश स्थित जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय चित्रकूट में अध्ययनरत दृष्टिहीन कुलदीप जोशी बेचलर ऑफ म्यूजिक के अंतिम समेस्टर का विद्यार्थी है। रविवार को सुबह पांच बजे से जोशी ने अपना तबला वादन विश्वविद्यालय परिसर में प्रारंभ किया तो लगातार शाम पांच बजे 12 घंटों तक उनकी अंगुलियां तबले पर थिरकती रहीं। गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकार्ड में दर्ज जाकिर हुसैन के रिकॉर्ड को तोडऩे की दिशा में जोशी का यह पहला प्रयास था। जोशी का लक्ष्य और संकल्प है कि वे एक न एक दिन अपना नाम गिनीज बुक में दर्ज करवाएंगे। संगीत शिक्षा के क्षेत्र में अचरज से देखे जाने वाले इस प्रयास की सफलता को जोशी वहां के प्रोफेसर गोपाल मिश्र का मार्गदर्शन एवं दीवड़ा छोटा निवासी शिक्षक शैलेष जोशी एवं उनके पिता की प्रेरणा एवं आसाराम बापू से मिलने वाला आत्मबल बताया। प्रोफेसर गोपाल मिश्र का कहना है कि भारत में किसी दृष्टिहीन विकलांग व्यक्ति द्वारा लगातार 12 घंटों तक तबला वादन करने वाला कुलदीप पहला व्यक्ति है। इस कारण इस रिकार्ड को लिम्का बुक या गिनीज बुक में जुड़वाने के प्रयास किए जा रहे है।
मेधावी छात्र है
मात्र आठ वर्ष की उम्र में आंखों की रोशनी चली जाने के बाद भी कुलदीप ने हिम्मत नहीं हारी। उनके पिता मानशंकर जोशी जो निठाउवा गामड़ी में शारीरिक शिक्षक है। उन्होंने अपने बेटे के प्रतिभा को पहचाना और उत्तरप्रदेश के चित्रकूट में स्थित विश्वप्रसिद्ध विकलांग विश्वविद्यालय में पढ़ाई करवाई। कुलदीप ने बेचलर ऑफ म्यूजिक में डिग्री प्रारंभ की तो पिछले दो वर्षों से लगातार वे विश्वविद्यालय टॉप कर रहे है जिस पर उन्हें लखनऊ में गोल्ड मेडल से नवाजा भी गया है। कुलदीप की माता शारदा देवी गृहिणी है और उनका भाई रोहित जोशी एमबीए कर मुंबई में नौकरी कर रहा है वहीं दूसरा भाई पूना में सीए कर रहा है। उनके पिता मानशंकर जोशी अपने बेटों के विकास को आसाराम बापू का आशीर्वाद मान रहे है। कुलदीप को दृष्टिहीन होने का मलाल नहीं है ।
आपके विचार
 
अपने विचार पोस्ट करने के लिए लॉग इन करें

लॉग इन करे:
या
अपने बारे में बताएं
 
 

दिखाया जायेगा

 
 

दिखाया जायेगा

 
कोड:
3 + 2

 
विज्ञापन

बड़ी खबरें

रोचक खबरें

विज्ञापन

बॉलीवुड

जीवन मंत्र

स्पोर्ट्स

जोक्स

पसंदीदा खबरें

फोटो फीचर

 
Email Print Comment