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अजमेर की भी तो सुनो ‘सरकार’

Bhaskar News | Jul 30, 2012, 07:20AM IST
 
 

वर्ष 2004 में राज्य सरकार ने गांधी भवन से बस स्टैंड तक के मार्ग पर वाहनों की गति सीमा 40 किमी प्रति घंटा तय की गई थी। तब करीब दो लाख वाहन थे। अब शहर में करीब चार लाख से भी ज्यादा वाहन हैं। हालत इतनी खराब है कि 40 किमी तो क्या लोग पैदल चलना ज्यादा मुनासिब समझने लगे हैं। कमोबेश पूरे शहर की यही हालत है। जाम..जाम..और जाम..।

पिछले सात साल से मार्टिडल ब्रिज से पुरानी आरपीएससी तक के मार्ग पर एलीवेटेड रोड की जरूरत महसूस की जा रही है। रोड कहां है यह सिर्फ सरकार ही बता सकती है। सड़कों को चौड़ा किया जा सकता है तो किया जाना चाहिए, नहीं तो कई वैकल्पिक रास्ते हैं। मगर सरकार है कि उन पर चलना ही नहीं चाहती। तोपदड़ा क्रॉसिंग से ओवरब्रिज बनाने का प्रस्ताव खटाई में पड़ा है अजमेर का जवाहरलाल नेहरू अस्पताल आज भी सुविधाओं को तरस रहा है।

सुपर स्पेशिएलिटी की बरसों से मांग हो रही है, मगर कोई ध्यान नहीं दे रहा। भाजपा शासन में मेडिसिटी के लिए विचार विमर्श हुआ था। महर्षि दयानंद सरस्वती विवि के करीब मेडिसिटी बनाने पर विचार हुआ था। यह वक्त की जरूरत भी है, क्योंकि नेहरू अस्पताल का मौजूदा भवन न केवल पुराना हो चुका है, बल्कि अब इसमें और सुपर स्पेशिएलिटी देने के लिए पर्याप्त स्थान भी नहीं है। 10 साल हो गए हैं, अशोक गहलोत के पिछले कार्यकाल में ही सीवेज लाइन बिछाने का काम शुरू हुआ था, अजमेर आज भी सीवेज को तरस रहा है।

नेहरू मिशन के तहत दरगाह प्रोजेक्ट के नाम से हाल ही में 352 करोड़ का ‘कथित प्रस्ताव’ सरकार ने तैयार करवाया है, लेकिन इसके तहत कब पैसा मिलेगा, कब योजना पर अमल होगा यह बताने के लिए कोई तैयार नहीं है। साल दर साल अजमेर की सुविधाओं, यहां के सरकारी दफ्तरों में लगातार कमी की जा रही है। अजमेरवासी आज भी यह सवाल करते नजर आते हैं कि अजमेर की कब सुनोगे ‘सरकार’ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कई मंत्रियों के अजमेर दौरे पर विशेष रिपोर्ट।
 
 
 

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