अब न करना शैतानी, आचरण-व्यवहार की भी होगी ग्रेडिंग
Source: Bhaskar News | Last Updated 07:47(09/02/12)
सीकर. बात चाहे स्कूल में व्यवहार की हो या दूसरे विद्यार्थियों के साथ आचरण की, सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) की ओर से अलग-अलग पैरामीटर्स पर विद्यार्थियों की ग्रेडिंग की जाती है।
कुछ इसी तर्ज पर अब सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूलों की भी ग्रेडिंग की जाएगी। इसमें कॅरिकुलम, स्कॉलिस्टिक एंड को-स्कॉलिस्टिक एक्टीविटीज, छात्र शिक्षक अनुपात, शिक्षक व शिक्षा की गुणवत्ता व स्कूल में बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर स्कूलों की रेटिंग होगी।
फिलहाल सीबीएसई पायलट बेसिस पर स्कूल क्वालिटी एसेसमेंट एंड एक्रीडिएशन (एसक्यूएए) शुरू कर रहा है। यह ऐच्छिक स्कीम है। अगर कोई स्कूल अपने निश्चित पैरामीटर्स पर रेटिंग करवाना चाहे, तो वे अपने स्कूलों की रेटिंग करवा सकते हैं। हालांकि कुछ समय बाद यह स्कीम अनिवार्य कर दी जाएगी।
ऐसे होगा मूल्यांकन
इस योजना के तहत बोर्ड की तरफ से कुछ पैरामीटर्स तय किए गए हैं। इनके आधार पर स्कूलों का मूल्यांकन होगा। ये पैरामीटर्स एक एक्रीडिएशन एजेंसी की ओर से सेट किए गए हैं। अगर कोई स्कूल इन पैरामीटर्स पर खरा नहीं उतरता है, तो उसे सुधार के लिए कुछ वक्त दिया जाएगा। इसके बाद स्कूल का दोबारा मूल्यांकन होगा।
नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रीडिशन काउंसिल की तर्ज पर योजना
सीबीएसई की ओर से लागू किया गया एसक्यूएए योजना यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन की ओर से कॉलेजों पर लागू किए गए नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रीडिशन काउंसिल (नैक) की तर्ज पर है। इसमें कॉलेज की आधारभूत संरचना, शिक्षा की गुणवत्ता समेत अनेक बिंदुओं पर मूल्यांकन किया जाता है। नैक की ओर से दिए जाने वाले ग्रेड के आधार पर यूजीसी कॉलेज को फंड देती है।
...तो रद्द हो जाएगी मान्यता
सीबीएसई के आदेशानुसार यह स्कीम वर्तमान में तो ऐच्छिक है लेकिन इस स्कीम के कंपलसरी होने के बाद अगर स्कूलों ने तीन-चार वर्षो के भीतर लागू नहीं किया, तो उसकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी।