हालात को दी मात और जिद से बन गए चैंपियन
Source: उमेश राजपूत | Last Updated 08:38(09/02/12)
कोटा. आपको जो लड़का पानी की पताशी (गोलगप्पे) खिला रहा है या फेरी लगाकर आपके क्षेत्र में कपड़े बेच रहा है, क्या आप उन्हें पहचानते हैं? इन्हें गौर से देखिए। हो सकता है कि यह कोई आम इंसान न होकर वह होनहार हो जो बॉडी बिल्डिंग में कोटा के लिए लगातार पदक पर पदक जीत रहा है। जी हां! इसी तरह के हालात का सामना कर रहे हैं कोटा के ये सच्चे सपूत।
कोटा की झोली में पदक डालने वाले इन बॉडी बिल्डरों की खुद की झोली भले ही खाली हो, लेकिन दिल में कोटा के साथ-साथ देश का नाम रोशन करने का जज्बा कूटकूट कर भरा हुआ है। ये हालात से जूझते हुए और हर चुनौती को अंगूठा दिखाते हुए आगे बढ़ रहे हैं।
इन्हें कोटा क्षेत्रीय खेल प्रशिक्षण केंद्र और खेल परिषद् से यात्रा भत्ता और किट नहीं मिलने और इनकी मदद के लिए किसी सामाजिक संस्था आगे नहीं आने का मलाल है। इसके बावजूद इनके पास हौसले की कमी नहीं है और जिद है कि हर मौके को भुनाते हुए चैंपियन बनना है।
जिला खेल अधिकारी एएस भाटी से सीधी बात :-
बॉडी बिल्डिंग के खिलाड़ियों को यात्रा भत्ता क्यों नहीं दिया जा रहा है?
- 2005 में खेल अधिनियम लागू होने के बाद कोटा जिला बॉडी बिल्डिंग संघ ने रजिस्ट्रार सहकारी समितियां से पजीकृत होने का प्रमाण पत्र जिला खेल अधिकारी कार्यालय को उपलब्ध नहीं कराया है। इनके द्वारा जिला खेल प्रतियोगिता प्रमाणीकरण के लिए आवेदन भी विगत वर्षो में प्राप्त नहीं हुआ है। इस कारण जिला टीम को यात्रा व दैनिक भत्ता नहीं मिल पा रहा है।
अच्छा प्रदर्शन करने पर भी किसी भी खिलाड़ी की खेल परिषद् मदद क्यों नहीं कर रहा है?
- राज्य का कोई खिलाड़ी यदि राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतता है तो खेल परिषद् उसका नाम राज्य सरकार के पास भेजती है और फिर राज्य सरकार उसे पारितोषिक देकर सम्मानित करती है।
हम तो पंजीकृत हैं-
कोटा जिला बॉडी बिल्डिंग संघ स्पोर्ट्स एक्ट के तहत पंजीकृत हैं। हमने इससे संबंधित कागजात जिला खेल अधिकारी कार्यालय भेजे थे, यदि उनसे वे खो गए तो यह उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे हमसे पंजीकरण के काजगों की प्रतियां फिर से भेजने को कहते। इसके बावजूद हम उन्हें फिर से इन्हें भेज देंगे।
- अशोक औदिच्य, सेक्रेटरी, जिला बॉडी बिल्डिंग संघ
फेरी लगाकर बेचे कपड़े
संजय की इच्छा देश के लिए बॉडी बिल्डिंग में पदक जीतने की है। वह रोजाना शाम ३ घंटे जिम में पसीना बहाते हैं। वह पढ़े-लिखे नहीं हैं और उनके ऊपर अपने लाचार माता-पिता और एक छोटे भाई का पेट भरने की जिम्मेदारी है।
इसे ही पूरी करने के लिए वह दिनभर फेरी लगाकर कपड़े बेचते हैं। पहलवान को मिलने वाली डाइट तो दूर की बात है, कभी-कभी तो उनके पास दो वक्त के भोजन की व्यवस्था भी नहीं हो पाती है। वह भूखे पेट न सिर्फ मुकाबलों में उतर रहे हैं, बल्कि पदक भी जीत रहे हैं।
गोलगप्पे बेचकर गुजारा
सतीश मूलत: ग्वालियर के हैं। बचपन में एक सड़क हादसे ने इनसे इनके माता-पिता को छीन लिया। पढ़ाई के लिए पैसे नहीं थे तो १क् साल पहले रोजगार की तलाश में कोटा आए और गोलगप्पे बेचना शुरू कर दिया। आज भी इसी के जरिए अपने परिवार का गुजारा करते हैं।
कोटा आकर ही उन्होंने बॉडी बिल्डिंग की शुरुआत की और अब कोटा को ढेरों पदक दिलाना उनका मकसद है। उनके परिवार में पत्नी सहित दो नन्ही बेटियां हैं। अपने जुनून और पारिवारिक दायित्वों को पूरा करते-करते उनके ऊपर हजारों रुपए का कर्ज हो गया है। उन्हें इसका मलाल नहीं है। वह कहते हैं, जिस दिन मुझे स्पॉन्सर मिल गया, मेरी सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी।
विकलांगता बनी ताकत
शंकरलाल और प्रेमसुमन पैर से विकलांग हैं। दुर्भाग्य देखिए, शंकर ने होश संभालने से पहले ही मां को खोया तो प्रेम ने पिता को। शंकर के पिता एमबीएस में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे और बहुत ही तकलीफों से गुजरते हुए अपने बेटे को न सिर्फ बॉडी बिल्डर बनाया, बल्कि उसे शिक्षा भी दिलाई। वहीं, प्रेम की मां ने अपने बेटे को पढ़ाने और बॉडी बिल्डर बनाने के लिए खुद सब्जियां तक बेचीं।
नाम : दीपक नरवाल
उपलब्धि > 2012 में राज्य स्तरीय बॉडी बिल्डिंग चैम्पियनशिप (70 किग्रा भार वर्ग) में स्वर्ण, 2011में जू. मि. राजस्थान का खिताब, जू. मि. नार्थ इंडिया में स्वण, सी. मि. नार्थ इंडिया में रजत, मैन ऑफ राजस्थान का खिताब।
नौकरी की तलाश
पिता कुश्ती के शौकिया पहलवान और नगर निगम में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। दीपक १२ साल के थे तब उनके पिता चल बसे। उनका सपना बेटे को बॉडी बिल्डर बनाने का था। दीपक ने पिता के इस सपने को अपना जुनून बनाया और आज कोटा को बॉडी बिल्डिंग में कई पदक दिला चुके हैं। कई समस्याएं आई, लेकिन मां ने उन्हें बेटे तक नहीं पहुंचने दिया। अब दीपक को एक नौकरी की तलाश है, जिससे वह अपनी मां को थोड़ा सुख दे सकें। दीपक का सपना बॉडी बिल्डिंग की विश्व चैंपियनशिप जीतने का है।
जानिए बॉडी बिल्डिंग के बारे में...
प्रमुख संस्थाएं:
- इंटरनेशनल बॉडी बिल्डिंग फेडरेशन, न्यूयॉर्क
- इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ बॉडी बिल्डर्स, कनाडा
- एशियन बॉडी बिल्डिंग फेडरेशन, सिंगापुर
- साउथ एशियन बॉडी बिल्डिंग फेडरेशन, मालदीव
- इंडियन बॉडी बिल्डिंग फेडरेशन, नई दिल्ली
- राजस्थान स्टेट बॉडी बिल्डिंग एसोसिएशन, जयपुर।
प्रमुख प्रतियोगिताएं:
- मिस्टर यूनिवर्स
- मि. वल्र्ड
- मि. साउथ एशिया
- मि. एशिया ञ्चमि. इंडिया।
ऐसे होती है बॉडी बिल्डिंग प्रतियोगिता
-पहले राउण्ड में प्रतिभागी को 7 अनिवार्य पोज का प्रदर्शन करना होता हैं। मुकाबला टाई होने पर 8वें पोज का प्रदर्शन करना होता है।
-दूसरे राउण्ड में उसे निर्णायकों की पसंद के 4 पोज का प्रदर्शन करना होता हैं।
-तीसरे राउण्ड में उसे 1 मिनट में ज्यादा से ज्यादा पोज का प्रदर्शन करना होता है।
-चौथे राउण्ड में उसे 1 मिनट में निर्णायकों की पसंद के ज्यादा से ज्यादा पोज का प्रदर्शन करना होता है।
बॉडी बिल्डिंग के पोज : फ्रंट डबल बाईसेप्स, फ्रंट ब्रॉडनेस, साइड चेस्ट, बैक डबल बाईसेप्स, बैक ब्रॉडनेस, एब्स विद थाई, ट्रीपी जेज, साइड ट्राई सेप।