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ठेकेदार भागे मंत्रीजी की सड़क से
Bhaskar News Network | Apr 16, 2012, 04:39AM IST
स्थिति यह है कि पीडब्ल्यूडी में अब तक बीएसआर से बिलो रेट में भी टेंडर छुड़ाने के लिए ठेकेदारों में मारामारी मची थी, अब अबोव रेट में भी कोई काम करने को तैयार नहीं है। हाल ही मंत्रीजी के निर्वाचन क्षेत्र में पलायथा से सांगोद तक 6 करोड़ की लागत से 10 किमी लंबी सड़क बनाने के लिए सिर्फ एक ठेकेदार ने टेंडर भरा, वह भी काफी ऊंची दरों पर। एक ही टेंडर होने के कारण इसे निरस्त करना पड़ा।
जब से भरतसिंह ने को पीडब्ल्यूडी का चार्ज मिला है। उन्होंने चल रहे कार्यो की गुणवत्ता स्वयं जांचना शुरू कर दिया है। इसमें लापरवाही पाए जाने पर ठेकेदार को तुरंत ब्लैकलिस्ट करने व अभियंताओं के खिलाफ कार्रवाई करना शुरू कर दिया है।
पिछले दिनों बूंदी जिले में खटकड़ रोड पर सड़क की गुणवत्ता खराब पाए जाने पर ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर दिया। इसके साथ ही एसई, एक्सईएन व एईएन को चार्जशीट थमा दी गई। इसी प्रकार झालावाड़ जिले में दो इंजीनियरों को एपीओ कर दिया गया। सांगोद रोड की खराब स्थिति पर इंजीनियरों को फटकार लगाई गई। उनके इस रवैये से विभाग में कार्य कर रहे ठेकेदारों में ही नहीं बल्कि अधिकारियों में भी घबराहट फैली हुई है। ठेकेदार नए ठेके लेने से पीछे हट रहे हैं।
पिछले दिनों विभाग ने पलायथा से सांगोद रोड पर लगभग 10 किलोमीटर सड़क बनाने के लिए 6 करोड़ रुपए की निविदाएं आमंत्रित की। पहले इस प्रकार की निविदाओं में ठेकेदार बीएसआर दर से भी कम दर पर कार्य करने के लिए तैयार रहते थे।
इस कार्य के लिए मात्र एक ठेकेदार ने टेंडर भरा उसने भी बीएसआर से काफी अधिक दर भर दी। एक ही टेंडर आने के कारण विभाग ने इसे स्वीकार नहीं कर दुबारा टेंडर प्रक्रिया शुरू की है। इसी प्रकार कोटा से सांगोद रोड पर ढाई करोड़ रुपए के बैलेंस वर्क कराने के टेंडर में कोई ठेकेदार ही नहीं आया।
इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि यह दोनों कार्य मंत्री के इलाके से संबंधित है। उनके यहां आने व जाने के दौरान होने वाले कार्य की निगरानी होती। वे कोई भी गड़बड़ी निकाल देते और भुगतना ठेकेदार को पड़ता।
विभाग के अधिकारी मानते हैं कि अब ठेकेदारों की मनमर्जी नहीं चलेगी। उन्हें पूरी गुणवत्ता के साथ कार्य करना ही होगा। जो ठेकेदार यह कार्य नहीं कर पा रहे, वे ही अब कार्य करने से पीछे हट रहे हैं। जिस प्रकार से मंत्री की सख्ती है, उससे अन्य कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। उनका मानना है कि जो रेट विभाग विभाग दे रहा है उसमें आसानी से काम हो सकता है। पूरी गुणवत्ता से कार्य करने पर इतनी बचत नहीं हो सकती, जितनी वे चाहते हैं।





