छात्रों को कापियां दिखाने में संकोच क्यों?
Source: पंकज यादव, | Last Updated 05:31(06/02/12)
अजमेर.देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट ने भले ही विद्यार्थियों को उनकी उत्तर पुस्तिकाएं देखने का हक दे दिया हो लेकिन इस फैसले की पालना करने में शिक्षण संस्थान अब भी संकोच कर रहे हैं। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड जैसी उच्च संस्थाओं ने तो कमेटी बनाने की आड़ में ही लंबा समय गुजार दिया। वहीं कई संस्थानों ने तो सीधे तौर पर शीर्ष अदालत के फैसले को ताक पर रख दिया है।
ऐसा ही एक संस्थान कोटा तकनीकी विश्वविद्यालय है, जो छात्रों को अर्जी देने के बावजूद उत्तर पुस्तिकाएं नहीं दिखा रहा है। विश्वविद्यालय की कार्रवाई से पीड़ित छात्र को कानूनी कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा है। ये है सुप्रीम कोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने 9 अगस्त 2011 को महत्वपूर्ण फैसला दिया था।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकंडरी एजुकेशन समेत कई शिक्षण संस्थाओं की अपीलों को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आरवी रविंद्रन और एके पटनायक ने निर्णय दिया था। इसके तहत सभी छात्र चाहे वे स्कूली शिक्षा के हों, कॉलेज शिक्षा से हों या फिर किसी भी प्रोफेशनल कोर्स से जुड़े पाठयक्रम से जुड़े छात्र हों को इस फैसले से राहत दी गई है।
छात्रों को यह हक दिया गया है कि वे सूचना का अधिकार कानून के तहत अर्जी दायर कर परीक्षा आयोजित कराने वाले संस्थान से उत्तर पुस्तिकाएं देखने की मांग कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई की सूचना के अधिकार से बाहर रखने की दलील को नकारते हुए कहा था कि उत्तर पुस्तिकाएं ‘सूचना’ की परिभाषा के दायरे में आती है। इसलिए आरटीआई के तहत उत्तर पुस्तिकाएं दिखाने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
और ये नहीं मानते सुप्रीम कोर्ट का फैसला ..
आदर्श नगर निवासी आशीष झा कोटा तकनीकी विश्वविद्यालय के बी टैंक इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन का छात्र है। थर्ड सेमेस्टर के एक पेपर में उसे फेल घोषित किया गया तो आशीष को यकीन नहीं हुआ। उसने सूचना के अधिकार कानून के तहत विश्वविद्यालय को अर्जी देकर आंसर शीट दिखाने को कहा। लेकिन विश्वविद्यालय ने उसे जवाब दिया कि आंसर शीट की कॉपी नहीं दी जा सकती है।
तब आशीष ने कहा कि उसे आंसर शीट की कॉपी नहीं मांगी है वह तो अपनी आंसर शीट देखना चाहता है। अपील करने पर भी वहीं जवाब मिला और साथ ही यह भी कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में कॉपी दिखाने की व्यवस्था बॉम की बैठक होने बाद लागू की जाएगी। आशीष की माता हेमलता ने अपने बेटे की पीड़ा को समझते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से गुहार लगाई लेकिन कोई असर नहीं हुआ।
हेमलता का कहना है कि उनका बेटा होनहार है और वह फेल नहीं हो सकता, अगर विश्वविद्यालय गलत नहीं है तो कॉपी दिखाने से परहेज क्यों किया जा रहा है? मजबूर होकर अब हेमलता ने वकील कमल सिंह राठौड़ के जरिए विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक, लोक सूचना अधिकारी और कुलपति को कानूनी नोटिस भेजकर सात दिन के भीतर उत्तर पुस्तिका दिखाने की मांग की है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि अगर विश्वविद्यालय इस पर अमल नहीं करता है तो सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवमानना के आरोप में कार्रवाई की जाएगी।
तत्काल लागू होता है फैसला
वकील कमल सिंह राठौड़ ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 9 अगस्त 2011 को फैसला पारित किया था। फैसला सुनाए जाने के साथ ही तत्काल लागू हो जाता है। इसका उदाहरण है कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने टूजी स्पेक्ट्रम के मामले में फैसला सुनाया था। उसके दूसरे दिन ही ट्राई ने फैसले पर अमल भी शुरू कर दिया। लेकिन कोटा तकनीकी विश्वविद्यालय समेत अन्य शिक्षण संस्थान कमेटी बनाने व बॉम की बैठक की आड़ में छात्रों को उनके हक से वंचित कर रहे हैं।