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बेटियां हमारा गौरव, बेहतर कल के लिए संकल्प लें इन्हें बचाने का

 
Source: Bhaskar News   |   Last Updated 09:15(10/02/12)
 
 
 
 
कोटा. सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद समाज में कन्या भ्रूण हत्या की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। दुर्भाग्य यह है कि समाज के संपन्न तबके में यह कुरीति ज्यादा है।


स्त्री पुरुष लिंगानुपात में कमी हमारे समाज के लिए कई खतरे पैदा कर सकती है। इससे सामाजिक अपराध तो बढ़ेंगे ही महिलाओं पर होने वाले अत्याचार में भी बढ़ोतरी होने का अंदेशा है।


जनगणना के ताजा आंकड़ों से यह साबित होता है कि जिले में पीसीपीएडीटी एक्ट की पालना गंभीरता से नहीं की जा रही। दस साल पहले ही कोटा में प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 906 थी जो अब घटकर ८९६ रह गई है।


भास्कर का समाज से विनम्र आग्रह


वक्त बदल रहा है। ऐसा कुछ भी नहीं, जो बेटियां नहीं कर सकती। उसे जन्म लेने दें, पालें-पोसें, पढ़ा-लिखाकर समर्थ बनाएं। सच मानें, वह किसी बेटे से कम साबित नहीं होगी। लिंग के आधार पर किसी से भेद न करें और दूसरों को भी प्रेरित करें।


वैश्य समाज ने लिया बेटियों को बचाने का संकल्प


सभी समाजों में बेटियों की संख्या कम होने से भविष्य में घर बसाने की चिंता सताने लगी है। वैश्य समाज ने अक्टूबर से दिसंबर,11 तक देशभर में सर्वे करके हर समाज में बेटे-बेटियों का अनुपात जानने का प्रयास किया तो नतीजे चौंकाने वाले सामने आए। वैश्य समाज के सभी घटकों में प्रति 1 हजार बेटों पर बेटियों की संख्या मात्र 800 ही निकली।


5 फरवरी को इंदौर में हुए दिगंबर जैन सोश्यल ग्रुप फेडरेशन के राष्ट्रीय अधिवेशन में 9 राज्यों के 275 ग्रुप के 4 हजार प्रतिनिधियों ने शिरकत की। देशभर से आए सदस्यों ने इस बात पर चिंता जताई के सभी समाजों में बेटियों की तेजी से घट रही है, इस पर गंभीरता से कदम नहीं उठाए तो भविष्य में बेटियां नहीं मिलेंगी। अभी अंतरजातीय विवाह के मामले बढ़ने का सबसे बड़ा कारण भी यही माना जा रहा है।


सामाजिक अलख जगाएगा अनुभव ग्रुप


दिगंबर जैन सोश्यल ग्रुप (अनुभव) के 60 दंपत्ति सदस्य मिलकर समाज में बेटियां बचाने की मुहिम शुरू कर रहे हैं। अनुभव में 55 साल से ज्यादा उम्र के सदस्य हैं, जिनमें इंजीनियर, डॉक्टर, रिटायर्ड प्रशासनिक अधिकारी, उच्चाधिकारी, व्यवसायी, उद्यमी आदि शामिल हैं।


अध्यक्ष जेके जैन व मंत्री राजमल पाटौदी(तलवंडी) ने बताया कि पहले चरण में शहर में होर्डिस लगाकर ‘बेटी बचाओ-समाज बचाओ’, ‘सेव वाटर-सेव डॉटर’ का संदेश प्रचारित किया जाएगा। 50 जैन मंदिरों में बेटे-बेटी में कोई अंतर नहीं है जैसे बैनर व पोस्टर लगाए जाएंगे। पंपलेट्स के जरिए घर-घर में जागरूकता और समाज के बड़े कार्यक्रमों में बेटी बचाओ की अपील की जाएगी। शिक्षा संस्थानों के छात्रों के बैच बनाकर उन्हें भविष्य बचाने के लिए ट्रेनिंग दी जाएगी।


भ्रूण हत्या रोकने की पहल करेंगे


शहर के कई नागरिक संगठन व सामाजिक संस्थाएं मिलकर सोनोग्राफी सेंटर्स के संचालकों से अपील करेंगे कि वे गर्भवती महिलाओं की टेस्ट रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं करें, जिससे कन्या भ्रूण हत्या के मामलों में कमी आएगी।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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