निर्दयी मां तक क्यों नहीं पहुंच पाते पुलिस के हाथ
Source: Bhaskar News | Last Updated 08:30(09/02/12)
कोटा. शहर में दो जगह कुन्हाड़ी व वीर सावरकर नगर में मृत नवजात मिले और रावतभाटा में एक मां अपने पेट से जन्मे मासूम को मरने को छोड़ गई। उसे जेके लोन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वीर सावरकर नगर में नाले के पास पॉलिथीन में मिले मृत नवजात का आधा धड़ जानवरों ने नोचा हुआ था।
भ्रूण व नवजात को फेंकने वाले 99 फीसदी मामलों मंे पुलिस उस निर्दयी मां को तलाशने मंे नाकाम ही रहती है। पुलिस मुकदमा दर्ज कर इतिश्री कर लेती है और बाद मंे उसको बंद भी कर देती है। शहर मंे सालाना भ्रूण व नवजात को फेंकने के करीब 8 से 10 मामले सामने आते हैं। इनमंे भी गर्भपात की नीयत से फेंके गए भ्रूण के मामले अधिक होते हैं। कोई भी महिला या युवती गर्भ छिपाने के लिए गर्भपात कराती है और भ्रूण को फेंक दिया जाता है।
पुलिस भ्रूण को बरामद कर बकायदा उसका पोस्टमार्टम कराती है। मां के खिलाफ मामला भी दर्ज किया जाता है। पुलिस अधिकारी भी जानते हैं कि इस मामले मंे हाथ खाली ही रहने हैं। इसलिए वे भी ज्यादा मशक्कत नहीं करते। अंत मंे समय रहते मुकदमे की फाइल बंद कर मुक्त हो जाते हैं। जांच अधिकारी का मानना होता है कि बिना पहचान के आरोपी तक पहुंचना बहुत मुश्किल होता है।
चंबल किनारे गड्ढे में मिला नवजात का शव
कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र में चंबल नदी किनारे बुधवार दोपहर पुलिस ने एक चार-पांच दिन की मासूम बच्ची का शव बरामद किया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए एमबीएस अस्पताल के पोस्टमार्टम रूम में रखवाया है। एसआई धन्नालाल ने बताया कि दोपहर को सूचना मिली कि बापूनगर कच्ची बस्ती के पास चंबल किनारे एक बच्ची का शव पड़ा है। मौके पर पहुंचे तो बड़ी संख्या में भीड़ एकत्र थी।
नवजात का शव एक प्रिंटेड कपड़े में लिपटा था। नवजात की उम्र करीब चार-पांच दिन की लग रही थी। पेट में कैनूला लगा होने से ऐसा प्रतीत होता है जैसे पास ही किसी अस्पताल में पहले तो उपचार करवाया और बाद में मृतावस्था में कोई यहां पटक गया। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। आसपास के अस्पतालों में भी पूछताछ की जाएगी। उधर, महावीर नगर थाना इलाके के वीर सावरकर नगर के नाले से भी पुलिस को प्लास्टिक के कट्टे में बंद एक भ्रूण मिला। जानवरों ने भ्रूण को नोंच रखा था। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
उधर, रावतभाटा के पावर हाउस रोड पर एक बाड़े में नवजात शिशु मिला है। आरपीएफ कॉलोनी में रहने वाले सफाई कर्मचारी प्रेम बाई व पप्पू ने बच्चे की आवाज सूनी तो पुलिस को सूचित किया। इस पर पुलिस ने शुशु को रावतभाटा अस्पताल में ले जाया गया। जहां से नवजात को कोटा जेके लोन अस्पताल में रैफर कर दिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। वहीं बच्चे के फूट प्रिंट ले लिए है। डॉ.संजीव सक्सेना ने बताया कि नवजात शिशु स्वस्थ है।
नवजात अनाथालय के भरोसे
पुलिस को कई बार एक दिन से लेकर सात दिन तक के नवजात इधर-उधर छोड़े हुए मिले। पहले तो उन्हें जेके लोन अस्पताल में भर्ती कराया जाता है। बाद में उसकी जिम्मेदारी करणी नगर विकास समिति को दे दी जाती है। बाद मंे उसे कोई न कोई परिवार गोद ले लेता है, लेकिन पुलिस उसके असली मां-बाप का पता नहीं लगा पाती।
पहचान नहीं होने से आती है दिक्कत
यह सही है कि इस तरह के मामलों मंे पुलिस आरोपी तक नहीं पहुंच पाती है। इसमें सबसे बड़ी दिक्कत पहचान की आती है। भ्रूण व नवजात की पहचान नहीं होने से उसके परिवार का पता लगाना बहुत मुश्किल होता है। इसमंे जन्म देने वाला ही उसकी पहचान छिपाता है। इस कारण भी पुलिस आरोपी तक नहीं पहुंचती। अंत मंे इस पर एफआर (फाल्स रिपोर्ट) ही लगानी पड़ती है।
- प्रफुल्ल कुमार, एसपी सिटी