पुलिस की मदद चाहिए तो 100 नंबर के भरोसे न रहें

सीकर.अगर आप कहीं फंसे हुए हैं या फिर किसी घटना पर तुरंत पुलिस की जरूरत है तो पुलिस के आपातकालीन 100 नंबर के भरोसे न रहें। ये कोई जरूरी नहीं है कि इस नंबर पर फोन करने से आपके आसपास की पुलिस मौके पर पहुंच जाएगी।
प्रदेशभर में 100 नंबर के यही हाल है। जिस इलाके से फोन लगाया जाए वहां के कंट्रोल रूम में फोन पहुंचने की बजाय अन्य जिलों के कंट्रोल रूम में जा रहे हैं। पुलिस के आलाधिकारी भी आमजन को हो रही इस परेशानी को स्वीकार कर रहे हैं। नियमों के मुताबिक जिस थाना इलाके से 100 नंबर डायल किया जाता है।फोन उसी से संबंधित कंट्रोल रूम में जाना चाहिए। ताकि आपातकाल की स्थिति में तुरंत कार्रवाई हो सके और पुलिस मौके पर पहुंच जाए।
प्रदेश का 100 नंबर पुलिस को समय पर सूचना नहीं दे रहा है। मसलन सीकर से 100 नंबर डायल किए जाने पर फोन जोधपुर, जयपुर सहित कई अन्य जिलों में पहुंच रहा है। सबसे ज्यादा फोन जयपुर शहर कंट्रोल रूम में जा रहे हैं। जो कि सीकर में समय पर पुलिस नहीं भेज सकता है। अन्य जिलों के भी यही हालात है।
कई बार जोधपुर, बीकानेर व हरियाणा तक के फोन सीकर व अन्य जिलों के कंट्रोल रूम में पहुंच जाते हैं। इस पर पुलिस आलाधिकारी इसे मोबाइल व टेलीफोन कंपनियों की तकनीकी खराबी बता रहे हैं। यहां तक कि ज्यादातर मोबाइल से 100 नंबर पर तो फोन लगता ही नहीं। भास्कर ने रविवार को अलग अलग मोबाइल व लैंडलाइन से फोन मिलाया तो जयपुर सिटी कंट्रोल व अन्य जिलों में पहुंच गया। वहां से जवाब मिला कि आपके जिले का एसटीडी कोड लगाकर 100 नंबर डायल करें लेकिन इसके बाद मोबाइल नंबर ही गलत बता रहे हैं।
समस्या के बड़े उदाहरण
कुछ दिन पहले पुलिस के एक उच्च अधिकारी किशनगढ़ में जाम में फंस गए। उन्होंने 100 नंबर डायल किया तो फोन कोटा जा पहुंचा। दोबारा डायल किया तो फोन जोधपुर कंट्रोल रूम में पहुंच गया।
कुछ दिन पहले दुर्घटना की सूचना देने के लिए सीकर से फोन लगाया तो भरतपुर पहुंच गया। दुबारा लगाया तो हिसार ही लग गया।
हां यह परेशानी है, कंपनियों से बात करेंगे : एडीजी
भास्कर ने इस मामले में जब पुलिस के एडीजी टेलीकम्यूनिकेशन टीएल मीणा से बात की तो उन्होंने कहा कि हां इस तरह की परेशानी आ रही है। उनका कहना था कि इसमें पुलिस वायरलेस की बजाय मोबाइल व टेलीफोन कंपनियों की तकनीकी खराबी है। बीएसएनएल को इसे दूर करना चाहिए। इस मामले में पहले भी क्राइम ब्रांच की ओर से कंपनियों को चिट्ठी लिखी जा चुकी है। फोन संबंधित थाना इलाके के कंट्रोल रूम में जाना चाहिए। दोबारा कंपनियों से बात की जाएगी।







