घुट्टी के नाम पर कहीं मासूम संग धोखा न हो जाए
Source: Bhaskar News | Last Updated 08:45(10/02/12)
सीकर. नवजात शिशु को जन्मते ही घुट्टी के नाम गुड़, शहद, अजवायन का पानी आदि न पिलाएं। विशेषज्ञ डॉक्टरों ने घुट्टी देने की आम परंपरा को बच्चे की सेहत के लिए खतरनाक बताया है। इससे बच्चे को निमोनिया, संक्रमण, डायरिया, पेट दर्द की शिकायत हो सकती है।
जिससे उसकी जान को भी खतरा रहता है। ब्रेस्ट फीडिंग प्रमोशन नेटवर्क ऑफ इंडिया, नई दिल्ली से आए नेशनल लेवल ट्रेनर एवं न्यू बोर्न एंड चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ जीएल अरोड़ा का कहना है, बच्चे को सबसे पहले मां का दूध ही पिलाया जाए। पहले दूध में सबसे ज्यादा रोग प्रतिरोधक क्षमता होती है। लेकिन खासकर ग्रामीण अंचल में घुट्टी पिलाने की धारणा प्रचलित है।
कहा जाता है, परिवार में बच्चे को जो घुट्टी पिलाएगा, बच्चे में उस जैसे संस्कार ही आते हैं। यह गलत है। इसलिए ही सरकार की ओर से माताओं को जागरूक किया जा रहा है कि वे छह महीने तक बच्चे को अपने दूध के अलावा कुछ न दें। घुट्टी रुई से भी दी जाती है जो साफ नहीं होती। कई बार चम्मच से पिला दी जाती है, जिस पर भी कीटाणु चिपके होते हैं और नवजात में इनसे लड़ने की क्षमता नहीं होती।
यशोदाओं का प्रशिक्षण शुरू
सीकर व झुंझुनूं के डॉक्टरों को नेशनल लेवल के ट्रेनरों द्वारा प्रशिक्षण देने के बाद गुरुवार को यशोदाओं का प्रशिक्षण शुरू हो गया है। मीडियम लेवल ट्रेनर डॉ एमएस फगेड़िया ने यशोदाओं को स्तनपान के तरीके एवं उसका महत्व समझाया। यशोदाओं का प्रशिक्षण शनिवार तक चलेगा। इस मौके पर नोडल ऑफिसर यतिंद्र शर्मा भी मौजूद थे।