'हर बार कर्जे माफ नहीं कर सकती सरकार '
Source: Bhaskar News | Last Updated 00:49(05/02/12)
जयपुर.खादी संस्थाओं को सरकारी सहायता और कर्ज माफी के बजाए अब खुद के बूते पर विकास करना होगा। केंद्र खादी संस्थाओं को अब तय अनुदान से ज्यादा सहायता देने के मूड में नहीं है।
केंद्रीय एमएसएमई मंत्री वीरभद्र सिंह ने शनिवार को प्रदेश स्तरीय खादी सम्मेलन में कहा कि नई तकनीक से उत्पादन बढ़ाने व नई विधियां अपनाने की जरूररत है। पैकेजिंग अच्छी हो और मार्केटिंग आक्रामक हो तो आप मिट्टी भी बेच सकते हैं। सरकार हर वक्त कर्जे माफ नहीं कर सकती।
उन्होंने कहा कि कमजोर खादी इकाइयों के लिए कर्ज माफी का प्रस्ताव भेजा जाएगा, प्रधानमंत्री से इस पर बात करेंगे।साथ ही खादी की कताई का काम नरेगा में शामिल करने की मांग उठाई गई है। मंत्रालय स्तर पर इसका प्रस्ताव तैयार करवाकर कैबिनेट में भेजा जाएगा। खादी का पूरे देश में एक ही लोगो और ट्रेडमार्क हो, इसके लिए प्रक्रिया चल रही है।
उन्होंने कहा कि आज किसी भी राज्य में न्यूनतम मजदूरी 100 रु. से कम नहीं है, वहीं खादी के कतिन दिन भर की कड़ी मेहनत के बावजूद 50 रुपए से ज्यादा नहीं कमा पाते। राजस्थान में खादी संस्थाएं घट रही है, लेकिन यह कहानी हर राज्य की है। खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष अनिल पारीक ने भी कमजोर खादी कामगारों और संस्थाओं के कर्ज माफ करने की मांग की।
सम्मेलन में खादी राज्य मंत्री बाबूलाल नागर, खादी ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष देवेंद्र आर. देसाई, राजस्थान खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष अनिल पारीक, झारखंड खादी ग्रामोद्योग आयोग के अध्यक्ष जयनंदू, खादी ग्रामोद्योग आयोग उत्तर क्षेत्र के सदस्य देशराज गौतम, खादी ग्रामोद्योग व लघु उद्योग विभाग के प्रमुख सचिव अशोक सिंघवी, राजस्थान खादी ग्रामोद्योग बोर्ड की सचिव सुषमा अरोड़ा और राजस्थान खादी ग्रामोद्योग संस्था संघ के अध्यक्ष इंदू भूषण गोईल ने भी विचार व्यक्त किए।
डाकघर में चिट्ठी की तरह मिलने लगे हैं स्टे ऑर्डर
वीरभद्र सिंह ने कहा कि कई खादी संस्थाएं स्टे ऑर्डर लेकर बैठी हैं। कई बार सरकारी वकील ऐसे मामलों में तारीख पर ही पैरवी के लिए नहीं जाते। अब तय किया है कि खादी के खिलाफ जो भी मुकदमा होगा, सरकार बेहतरीन वकील खड़ा करेगी। स्टे ऑर्डर मिलना तो इतना आसान हो गया है कि जैसे डाकघर से चिट्ठी ले रहे हों।