एक मरीज की मौत, और ऐसा डर कि अस्पताल के इस कमरे में लग गया ताला

सीकर.एसके अस्पताल में शनिवार को हाइड्रो फोबिया से एक युवक की मौत के बाद स्टाफ सहमा हुआ है। मेल मेडिकल के जिस कमरे में मरीज को भर्ती किया गया था, उसके ताला लगा दिया है। स्टाफ को डर है कि कमरे में फ्यूमीगेशन न कराने के साथ गद्दा व चद्दर को डिस्पोज न करने से उन्हें व अन्य मरीजों को हाइड्रो फोबिया हो सकता है।
स्टाफ ने रविवार के बाद बुधवार को भी पीएमओ को चिट्ठी लिखी है लेकिन अस्पताल प्रशासन ने अभी तक इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया है। उल्लेखनीय है कि नागौर के गांव चंद्रावत निवासी 25 वर्षीय नेमाराम पुत्र गणपतराम की शनिवार को अस्पताल में मौत हो गई थी। इसका तीन डॉक्टरों से इलाज भी हुआ। उसके गले में दिक्कत बताने पर शुक्रवार को ईएनटी स्पेशलिस्ट को दिखाया गया था।
बाद में उसके द्वारा बहकी बातें करने पर मनोरोग विशेष का इलाज शुरू हुआ और उसे भर्ती कर लिया। अगले दिन शनिवार शाम जब फिजिशियन डॉ एमएस सारण ने देखा तो उसमें हाइड्रो फोबिया के लक्षण दिखाई दिए। उसे रैफर करा कर परिवार वाले जयपुर ले जाने की तैयारी में थे इससे पहले ही उसकी यहां मौत हो गई। कार्यवाहक पीएमओ डॉ बीएल राड़ का कहना है कि कमरा बंद करने की जानकारी नहीं है। कमरे को फ्यूमीगेट करा दिया जाएगा।
बचाव के लिए बंद किया कमरा
मेडिकल वार्ड के इंचार्ज बनवारीलाल मीणा व अन्य स्टाफ का कहना है कि अस्पताल प्रशासन को दो बार चिट्ठी लिखी जा चुकी है। अभी तक ध्यान नहीं दिया। बचाव के लिए ही कमरे को बंद किया हुआ है। उन्होंने खुद को टीके भी अपने स्तर पर लगवाए हैं।
बिस्तर छूने से हो सकता है हाइड्रो फोबिया
एसके अस्पताल के डॉ देवेंद्र दाधीच व डॉ एमएस सारण का कहना है हाइड्रो फोबिया पीड़ित व्यक्ति की लार, पसीना, ब्लड या उसके लिए काम में लिए उपकरण दूसरे को छू जाए तो उसे भी यह बीमारी हो सकती है। इसके लिए अलग से आइसोलेशन वार्ड है लेकिन मरीज का पहले पता न लगने पर ही वह सामान्य वार्ड में भर्ती हुआ। कमरे में फ्यूमीगेशन की ज्यादा जरूरत नहीं है। हां, उसके बिस्तर जैसे चद्दर आदि को डिस्पोज करना जरूरी है।








