मध्य प्रदेश के मालवा अंचल में हो रही बरसात के चलते बारां-झालावाड़ जिले में नदियां और नाले उफान पर आ गए। अटरू से करीब छह किमी दूर पार्वती नदी में उफान आने के कारण रविवार को एक युवक फंस गया। वह टापू पर लकड़ियां लेने गया था।
इसके पांच-छह साथी तो पानी का प्रवाह बढ़ते देख तैरकर बाहर निकल गए, लेकिन युवक को तैरना नहीं आने के कारण वह टापू पर ही रह गया। एसपी शिवलाल जोशी ने बताया कि रविवार सुबह 9 बजे अटरू के जेल कॉलोनी निवासी भरतराज (20) पुत्र बाबूलाल कालबेलिया कॉलोनी के 8-9 महिला-पुरुषों के साथ पार्वती नदी के टापू पर लकड़ियां लेने गया था।
एमपी में तेज बारिश होने के चलते दोपहर करीब 12 बजे नदी में पानी का बहाव तेज होने लगा। इसे देखकर भरतराज के साथ गए अन्य महिला-पुरुष तो जैसे-तैसे तैरकर बाहर आ गए, लेकिन भरत तैरना नहीं आने के कारण टापू में ही फंसा रहा। इसके साथियों ने गांव में आकर इसकी सूचना ग्रामीणों व पुलिस को दी। इसके बाद ग्रामीणों के अलावा पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी रस्सियां, ट्यूब लेकर मौके पर पहुंचे। उसे निकालने के प्रयास किए जा रहे है।
बाद में कलेक्टर वी सरवन कुमार व एसपी जोशी ने उच्चाधिकारियों को अवगत कराकर कोटा से रेस्क्यू टीम बुलाई। कलेक्टर ने भी मौके पर पहुंचकर जायजा लिया। इस दौरान यहां पहुंची रेस्क्यू टीम ने रात करीब 9 बजे भरतराज को बाहर निकाला।
बांसवाड़ा में 26 घंटे से रिमझिम
रविवार को प्रदेश में कई स्थानों पर बारिश हुई। बांसवाड़ा में पिछले 26 घंटे से बारिश का दौर जारी है। जयपुर में शाम साढ़े 8 बजे तक 5.9 मिमी बारिश हुई। हनुमानगढ़ के रोडावाली में पिता-पुत्र तथा अबोहर (पंजाब) धरांगवाला में दंपती की नहर में डूबने से मौत हो गई।
उदयपुर संभाग के सबसे बड़े माही बजाज सागर बांध में पिछले कुछ दिनों से रुकी पानी की आवक फिर शुरू हो गई। बांसवाड़ा-दाहोद मार्ग पर स्थित सुरवानिया बांध का जलस्तर 12 फीट 1 इंच होने पर दस में से दो गेट खोलने पड़े। बीकानेर, पाली, जोधपुर, श्रीगंगानगर और अलवर में बादल छाए रहे, लेकिन लोगों का बारिश का इंतजार खत्म नहीं हुआ। बारां में 14 तथा डूंगरपुर में 18.6 मिमी. बारिश दर्ज की गई।
कम दबाव का क्षेत्र नहीं बनने से मानसून धीमा
मौसम विभाग के निदेशक एसएस सिंह का कहना है कि राज्य में फिलहाल कम दबाव का क्षेत्र नहीं बन पा रहा। इससे बादल छाए रहने के बावजूद बरसात नहीं हो रही। यह कम दबाव का क्षेत्र उड़ीसा व आसपास के इलाकों तक ही सीमित है। मध्य प्रदेश तक आते-आते यह धीमा पड़ जाता है।
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