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पलटेगी खस्ताहाल होते सरकारी भवनों की काया
Bhaskar News
| Aug 03, 2012, 06:44AM IST

निगम से सूची उपलब्ध होने के बाद पीडब्ल्यूडी द्वारा संबंधित भवनों का रखरखाव किया जा रहा था। अब तक संबंधित विभाग द्वारा पीडब्ल्यूडी को बजट डिपोजिट कराकर मरम्मत कराई जाती थी। यह पहला मौका है जब राज्य सरकार ने इस संबंध में परिपत्र जारी किया है। कलेक्टर ने हाल ही में सभी महकमों को अपने दफ्तर व आवासों की ऐसी इमारतों के सर्वे कराने के आदेश दिए हैं जो जर्जर हालात में हैं।
सभी महकमों के इसके मद्देनजर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। विभाग ने सरकार के निर्देश पर संभागीय आयुक्त को तकमीना बना कर बजट राशि की मांग की है। सरकार के अन्य विभागों की सर्वे रिपोर्ट के बाद पीडब्ल्यूडी द्वारा अपने स्तर पर इंजीनियरों के माध्यम से विस्तृत सर्वे रिपोर्ट तैयार कर तकमीना तैयार किया जाएगा। रख-रखाव में आने वाले खर्च की मांग संबंधित विभाग से करके मरम्मत का काम किया जा सकेगा।
दफ्तरों के हाल भी खराब
मरम्मत के अभाव में शहर समेत जिले में सरकारी इमारतों के हाल काफी खस्ता हैं। इनमें पुलिस के अलवर गेट, सिविल लाइन, गंज, कोतवाली व रामगंज थाना परिसर में स्थित जवानों के आवास, पुलिस लाइन के जवानों के आवास, लोहाखान, मीर शाह अली कॉलोनी में बने सरकारी आवासों की दशा खासी खराब हो चुकी है। इसके साथ ही कलेक्ट्रेट, आरपीएससी के पुराने भवन, नगर निगम के भवन, जेएलएन अस्पताल के भवन के हालात भी खासा खराब है।
इनका कौन है धणी-धोरी
सरकारी भवनों की दुर्दशा के शहर में कई जीते-जागते नमूने मौजूद हैं। इनमें एक खास जगह जनाना अस्पताल के पास स्थित जीएडी कॉलोनी भी है। इसका निर्माण एक दशक से भी अधिक समय पहले हुआ लेकिन उपयोग आज तक नहीं हो सका है। आयुर्वेद, ब्रिज कॉपरेरेशन के दफ्तर के अलावा यहां सभी आवास खाली पड़े हैं।
इसी प्रकार जयपुर रोड स्थित न्याय विभाग के आवास, रामगंज स्थित डाक विभाग की कॉलोनी, खान सुरक्षा निदेशालय, सीपीडब्ल्यूडी तथा एचएमटी के सैकड़ों आवास मरम्मत के अभाव में जीर्ण-शीर्ण हालात में पहुंच चुके हैं। इनमें से कई खाली पड़े हैं और कइयों की तो बरसों से मरम्मत तक नहीं की जा सकी है।
30 लाख चाहिए
'सरकार के आदेश के बाद सभी विभागों को अपने भवनों के सर्वे को कहा गया है। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद पीडब्ल्यूडी द्वारा एक बार सर्वे कर वस्तुस्थिति का जायजा लिया जाएगा। पुलिस लाइन व जीएडी भवनों की मरम्मत के लिए 30 लाख रुपए के बजट आवंटन का तकमीना संभागीय आयुक्त को भेजा गया है। आवश्यकता अनुसार मरम्मत का तकमीना बनाया जाएगा। संबंधित विभागों द्वारा बजट जमा कराने के बाद मरम्मत की कार्रवाई की जा सकेगी।'
- अशोक अग्रवाल, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी, अजमेर






