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किसानों की बल्ले-बल्ले: खेत में फैक्ट्री लगाओ और उद्योगपति बन जाओ

Bhaskar News | Jan 08, 2013, 10:55AM IST
 
 

करौली.व्यावसायिक सोच रखने वाले किसानों की उद्योगपति बनने की मंशा अब जल्दी ही पूरी होगी। मुख्यमंत्री बजट घोषणा 2012-13 के तहत राज्य सरकार राष्ट्रीय कृषि विकास योजनांतर्गत किसानों को खेत में फैक्ट्री लगाने पर 50 प्रतिशत या अधिकतम एक करोड़ रुपए तक का अनुदान देगी। इसके लिए राज्य सरकार ने 20 करोड़ रुपए का बजट जारी कर उद्यान विभाग को गाइड लाइन भेजी है।
 
गौरतलब है कि उद्योग धंधों से जोड़ने व फसल उत्पादन का पूरा फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से सरकार अब कृषकों को स्वयं की भूमि पर उद्यानिकी उत्पादों एवं पारंपरिक फसलों के साथ-साथ नकदी फसलों के साथ मसालों की प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने पर प्रोत्साहित करेगी। इससे व्यावसायिक सोच रखने वाले किसान खेती के साथ अब उद्योग जगत में भी अपनी किस्मत आजमा सकेंगे। 
 
राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत खेत में फैक्ट्री (प्रसंस्करण इकाई) स्थापित करने पर किसान को अधिकतम एक करोड़ रुपए तक का अनुदान मिल सकेगा। योजना के अनुसार सरकार किसानों को औद्योगिक इकाई स्थापित करने में आने वाले कुल खर्च का 50 प्रतिशत या अधिकतम एक करोड़ रुपए का अनुदान देकर आर्थिक रूप से प्रोत्साहित करेगी। 
 
विभाग अनुदान राशि किसान को दो किस्तों में उपलब्ध कराएगा। अनुदान लाभ के लिए किसान खेत में कृषि उत्पाद संबंधी फैक्ट्री स्थापित करने के लिए उद्यानिकी विभाग कार्यालय में आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने वाले किसान के नाम कृषि भूमि होना जरूरी है, खुद के नाम कृषि भूमि नहीं होने की स्थिति में अनुदान देय नहीं होगा। जबकि औद्योगिक क्षेत्र में फैक्ट्री लगाने पर सरकार किसी तरह का अनुदान नहीं देगी। 
 
राज्य सरकार ने इस संबंध में उद्यान विभाग को गाइड लाइन भेज दी है। योजनांतर्गत अनुदान का लाभ लेने के इच्छुक किसानों को उद्यान विभाग के कार्यालय में आवेदन करना होगा। इसके लिए खेत में लगाने वाली फैक्ट्री का नक्शा तथा प्रोजेक्ट रिपोर्ट पेश करनी होगी। 
 
इसमें प्रोजेक्ट शुरू होने तथा खत्म करने की निश्चित तिथि होगी। भूमि स्वामित्व का प्रमाण पत्र, 100 रुपए के स्टांप पर हलफनामा, आय-व्यय का ब्योरा देने के लिए सीए रिपोर्ट, उद्योग स्थापित करने पर आने वाली कुल लागत का एस्टीमेट तैयार करके जमा कराना होगा। 
 
करौली में उद्यान विभाग कार्यालय अलग से नहीं होने पर कृषि विभाग ही उद्यानिकी योजनाओं का संचालन कर रहा है। जिससे योजना का पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं हो पा रहा है। यही कारण है कि इस योजना में जिले से एक भी किसान का प्रपोजल नहीं मिला है। जबकि उद्यान विभाग के निदेशक ने गत 3 जुलाई 2012 को इस संबंध में विशेष निर्देश भी दिए। 
 
पांच साल तक फैक्ट्री का संचालन जरूरी
 
खेत में प्रसंस्करण इकाई स्थापित होने के बाद किसान को कम से कम पांच साल तक उसे चालू रखना होगा। इसके लिए उद्यान विभाग के सहायक निदेशक साल में एक बार स्थापित औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण भी करेंगे। पांच वर्ष तक उत्पादन कार्य नहीं होने पर किसान से अनुदान राशि छिन सकती है। 
 
दो किस्तों में होगा भुगतान
 
योजना के अनुसार कुल लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम एक करोड़ रुपए का अनुदान किसानों को दिया जाएगा। इसके तहत पूंजीगत निवेश में प्लांट एवं मशीनरी पर 50, सिविल कार्य पर 40 तथा कार्यशील पूंजी पर 10 प्रतिशत लागत मानी गई है। अनुदान राशि का भुगतान दो किस्तों में होगा। अनुदान की पहली किस्त प्रशासनिक स्वीकृति तथा दूसरी किस्त इकाई के पूरा होने पर दी जाएगी।
 
ये औद्योगिक इकाइयां लग सकती हैं 
 
उद्यानिकी फसलें जैसे फल, सब्जी, फूल, मसाले, औषधीय, आंवला, संतरा, इसबगोल, आम, किन्नू, अमरूद, पपीता, नींबू, अनार, सीताफल, बेर, ग्वारपाठा, टमाटर,  मेंहदी,मसाले में जीरा, धनिया, मैथी तथा पारंपरिक फसलें तिलहन, दाल, गेहूं, जो, ग्वार आदि फसलों से संबंधित औद्योगिक इकाइयां स्थापित हो सकेंगी।
 
क्या कहते हैं अधिकारी
 
'राष्ट्रीय कृषि विकास योजनांतर्गत खेत में औद्योगिक इकाई स्थापित करने के लिए किसानों को प्रसंस्करण से संबंधित विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट देनी होती है। स्वयं की भूमि नहीं होने पर दीर्घ अवधि में न्यूनतम दस वर्ष पर लीज लेकर योजना का इच्छुक व्यक्ति लाभ ले  सकता है। इसका अनुदान किसान को दो किस्तों में मिलेगा।'
 
- लक्ष्मीनारायण शर्मा, कृषि अधिकारी व योजना प्रभारी, उद्यानिकी, करौली
 
 

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