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यहां अगर ठंडक मिलेगी कहीं तो वो सिर्फ दो सौ हाथ नीचे कुएं में ही!

bhaskar news | Jul 04, 2012, 05:29AM IST
 
 

सीकर/चूरू.कलेक्ट्रेट के पास स्थित मौसम केंद्र में उतरते चढ़ते पारे का सेंसेक्स चूरू सहित शेखावाटी के लिए बेहद मायने रखता है। यहीं की जुबान में एक कहावत भी है ‘शीतलता लीन्ही शरण, साठीका मं जावै।’ मतलब, यहां इस मौसम में ठंडक कहीं है तो वो सिर्फ दो सौ हाथ नीचे कुएं में ही कहीं छिपी मिल सकती है। इस पारे के चढ़ने के साथ ही बदल जाती है लोगों की दिनचर्या, भगवान के उठने और सोने का समय, कई रीति-कुछ रिवाज और प्रशासन की सड़कों पर पानी डालने भर जितनी वही रटी रटाई कुछ एहतियात।

सर्दी में जीरो और गर्मी में अर्ध शतक छूने को उतावली तापमापी के बीच कैसे जीता है शेखावाटी, दैनिक भास्कर ने जानने की कोशिश की। चूरू में सफेद घंटाघर के पास 11 बजने के साथ साथ सड़कें सूनी होने लगती है। कहने को ये सबसे व्यस्त मार्केट है। तिरपाल लगी दुकानें को भी पता होता है कि ग्राहक सूरज ढलने तक उनका रुख नहीं करेंगे। यही हाल सीकर के स्टेशन रोड का है। काम बेहद जरूरी हो तो ही दोपहर को लोग घरों से निकलने की जुर्रत करते हैं।

भगवान सुबह जल्दी ही जाग जाते हैं। मंदिरों में सुबह चार बजे ही घंटे-घड़ियाल बजने लगते हैं। कई मंदिरों के गर्भ गृहों में एसी और कूलर दिनभर भगवान की गर्मी दूर करते हैं। राबड़ी, प्याज, दही तथा लू से बचने के लिए केरी और नींबू पानी से घर आए मेहमानों की मनुहार की जाती है। शादी समारोहों के मीनू में भी ये सब नहीं हो तो बात नहीं बनती।


तीन दिनों में तो चूरू में गर्मी इस कदर बढ़ी है कि कलेक्टर को स्कूलों का ग्रीष्मकालीन अवकाश बढ़ाने तक हो मजबूर होना पड़ा है।

यहां इन दिनों जब भी लोग आपस में एक दूसरे से मिलते हैं तो बात की शुरुआत बैरन बन रही बिजली से ही होती है। पिछले दशक में एसी और इन्वटर्स की डिमांड एकदम से बढ़ी है। विकास के रास्ते बढ़ने को आतुर चूरू में सर्दी और गर्मी की मार बड़ी बाधा है।
 
 
 

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