सीकर.नवजात बच्चे को दो साल तक ब्रेस्ट फीडिंग कराया जाना चाहिए। छह माह तक कुछ न तो खिलाएं और न ही उसे पिलाएं। छह माह के बाद उसे दलिया, खिचड़ी, पपीता व चावल आदि मथ कर खिलाया जा सकता हैं। बच्चे का जन्म के समय वजन कम हैं तो घबराएं नहीं।
यदि नियमित व सही तरीके से मां का दूध मिलता है तो उसके शारीरिक व मानसिक विकास पर कोई असर नहीं पड़ेगा। नेशनल ट्रेनरों ने डॉक्टरों की ट्रेनिंग के अंतिम व तीसरे दिन यह जानकारी दी ताकि वे आगे यशोदाओं को और यशोदा माताओं को यह बता सके। गुरुवार से ट्रेनिंग लेने वाले सीकर के डॉ बीएल राड़, डॉ एमएस फगेड़िया, झुंझुनूं के डॉ आरके मीणा व डॉ नरेंद्र शेखावत यशोदाओं को ट्रेनिंग देंगे। यह ट्रेनिंग तीन दिन चलेगी।
ट्रेनरों ने बताया कि देश में 33 फीसदी नवजात बच्चों का वजन जन्म के समय कम होता है। जबकि 33 फीसदी महिलाएं ही जन्म से छह माह तक सिर्फ ब्रेस्ट फीडिंग कराती है। ट्रेनरों ने बोतल से फीडिंग कराने को गलत बताते हुए कहा, इससे बच्चे के दस्ते होने के 14, सांस व एलर्जी की दिक्कत होने की पांच व अन्य बीमारी होने की ढाई गुणा संभावना बढ़ जाती है।