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मेहंदी साहब की जिंदगी से जुड़े पांच वाकये
Bhaskar News
| Jun 14, 2012, 07:08AM IST

1953 में मेहदी हसन की मुलाकात पाकिस्तान रेडियो में कार्यक्रम अधिकारी सलीम गिलानी से हुई। गिलानी को उनकी आवाज पसंद आई। उन्होंने उनसे कहा, मैं तुम्हें मौका दूंगा। पर तुम्हें इंतजार करना होगा। अभी मैं वॉयस ऑफ अमेरिका के लिए जा रहा हूं। तब तक तुम रियाज करो। किसी और के लिए मत गाना।
रेडियो के लिए तो बिल्कुल नहीं। गिलानी को अमेरिका से वापस आने में 4 साल लगे। जब वह लौटे तो उनके चपरासी ने बताया कि एक लड़का मिलने आया है। वह कई दिनों से आता है। नाम मेहदी हसन है। गिलानी को याद आ गया। इस तरह 1957 में उन्हें गाने का मौका मिला।
हारमोनियम को इंजन के समान बताते थे
बात उन दिनों की है जब मेहदी हसन ग़जलों के शहंशाह बन गए। एक बार जब उनका हारमोनियम टूट गया तो वह उसे खुद की रिपेयर करने लगे। लोगों ने जब पूछा कि आप क्यों कर रहे हैं तो बोले यह उन इंजनों के समान है, जिन्हें मैं वर्षो पहले ठीक किया करता था।
साज ऐसा छेड़ा की खाना भूल गए
झुंझुनू के उनके मित्र 73 वर्षीय अब्दुल हमीद बताते हैं कि एक बार कार्यक्रम के लिए हसन साहब आए थे। मौसम खराब हुआ तो प्रोग्राम नहीं हो पाया। खाने के लिए पहुंचे तो खाना भी खत्म। तभी हसन साहब हारमोनियम पर बैठ गए। रात भर महफिल चली।
दोस्त के लिए कोट उतार दिया
जयपुर में प्रोग्राम था। हसन साहब ने झुंझुनूं के मुनीर खां से भी चलने के लिए कहा। मुनीर बोले कि आप सब कोट में हैं। मैं कुर्ता-पायजामे में ठीक नहीं लगूंगा। वह कार से उतरे और होटल जाकर कुर्ता पायजामा पहनकर आ गए। बोले- ‘अब तो हमारे साथ चलो।’
मेहदी को सुनकर किसी को खुदा की आवाज याद आई तो किसी को खुदा ही मेहदी हसन की आवाज में खुदा की आवाज झलकती है।
लता मंगेशकर, सुर साम्राज्ञी
या खुदा ये कौन गा रहा है। इस आवाज के मालिक को मैं अपनी आंखों के सामने सुनना चाहती हूं।
नूरजहां, मल्लिका-ए-तरन्नुम (ये धुआं कहां से उठता है.. गजल सुनकर)
संगीत के गुलिस्तां में मेहदी हसन साहब ऐसे फूल हैं, जिनकी खुशबू कभी कम नहीं होगी।
एआर रहमान, संगीतकार







