ड्यूटी पर कामचोरी की सजा, अब लाइनहाजिर पर दिखाओ चुस्ती!
Source: Bhaskar News | Last Updated 07:54(09/02/12)
सीकर. नेशनल हाइवे पर लगातार हो रहे सड़क हादसों पर पुलिस ने कड़ा रुख अपना लिया है। बुधवार को एसपी ने रानोली थाना क्षेत्र में तैनात हाइवे पेट्रोलिंग स्टाफ के नौ पुलिसकर्मियों को ड्यूटी से हटा दिया। बुधवार को खाटू जाते वक्त खुद एसपी ने हाइवे पर पुलिस की सुस्ती देखी। सेवा में कोताही बरतने पर तुरंत प्रभाव से लाइन में भेज दिया।
उल्लेखनीय है कि फतेहपुर में हुए सड़क हादसे के बाद दैनिक भास्कर ने बुधवार को ही यह खुलासा किया था कि हाइवे पेट्रोलिंग पुलिस जिम्मेदारी से काम नहीं कर रही है।
जानकारी के मुताबिक एसपी गौरव श्रीवास्तव बुधवार दोपहर कलेक्टर के साथ खाटूश्यामजी जा रहे थे। इसी दौरान रानोली क्षेत्र में एक जगह जाम लगा हुआ मिला। इसके अलावा हाइवे पेट्रोलिंग टीम की ड्यूटी में लापरवाही भी मिली। इसको गंभीरता से लेते हुए एसपी ने तुरंत पूरे स्टाफ को हटा दिया है। एसपी गौरव श्रीवास्तव ने दैनिक भास्कर को बताया कि सड़क हादसों को लेकर पुलिस गंभीर है और इसमें किसी भी पुलिसकर्मी की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इधर, एएसपी शरद चौधरी ने बताया कि इनकी पुलिस लाइन में आमद करवा दी है। बताया जा रहा है कि यहां एएसआई शिव भगवान, पुलिसकर्मी गोवर्धन, नरेंद्र, नागरमल, बनवारीलाल, हरिकिशन, रामस्वरूप, सूरजभान व मदन तैनात थे।
दो जगह है हाइवे पेट्रोलिंग
जिले में एनएच 11 पर रानोली व लक्ष्मणगढ़ थाना क्षेत्रों में दो हाइवे पेट्रोलिंग की गाड़ियां तैनात हैं। लक्ष्मणगढ़ की गाड़ी फतेहपुर से लेकर सीकर तक के इलाके को कवर करती है और रानोली की गाड़ी पलसाना व रींगस तक। लेकिन ना तो ये तेजगति से चल रहे वाहनों के खिलाफ कोई कार्रवाई करते हैं और न ही दुर्घटना के वक्त मौके पर पहुंचते हैं।
धमाका सुनते ही एंबुलेंस से पहले दौड़ पड़ते हैं
फतेहपुरत्नहरसावा से फतेहपुर कस्बे तक नौ किमी हाइवे की सड़क के इर्द-गिर्द रहने वाले लोगों की सांसें जब तब अटक जाती हैं। क्योंकि इनका सामना आए दिन मौत के भयानक मंजरों से होता है। हरसावा बस स्टैंड पर चाय की दुकान चलाने वाले कैलाश कुमार बताते हैं महीने में एक दो बार तो ऐसा ही हो जाता है। जब तेज धमाका होता है तब महसूस हो जाता है कि हाइवे ने फिर किसी को लील लिया है।
अब तो इलाके के लोगों ने 108 इमरजेंसी एंबुलेंस का इंतजार करना छोड़ दिया है। जैसे ही हादसा होता है कि तुरंत जिंदगियां बचाने में जुट जाते हैं। पुलिस, प्रशासन और एबुलेंस वालों से पहले तो अमूमन ग्रामीण ही घायलों को अस्पताल पहुंचा देते हैं। हरसावा के ही रहने वाले रामावतार का परिवार भी दर्दनाक हादसे का शिकार हो चुका है। बताते हैं दो तरफा घुमाव और अचानक बस स्टैंड हादसों की बड़ी वजह बन रहा है।
छह महीने पहले ही उनकी मां की मौत इसी जगह हादसे में हो गई। इनका कहना है कि अब तो यूं लगने लगा है जैसे किसी एक्सीडेंट जोन में जिंदगी काट रहे हैं। या तो खुद कभी हादसे में घायलों को निकाल रहे होते हैं या फिर दूसरे गांव की खबर पढ़ने को मिल जाती है।
इसी नौ किमी दायरे में रहने वाले सेवानिवृत्त सैनिक हरलाल सिंह के मुताबिक लगातार हो रही मौतों से प्रशासन और वाहन चालक सबको सबक लेना होगा। क्योंकि जब इस इलाके में हादसा हुआ है हमारा अनुभव बताता है जिंदगी बमुश्किल ही बच पाई है। ऐसे में वाहन की गति पर खुद लगाम लगाए और शासन-प्रशासन भी अपनी जवाबदेही तय करे।
आगे कुछ दिखता नहीं तो भी तेज दौड़ाते हैं वाहन
> इस इलाके में तीखे घुमाव हैं। दो स्थान पर तो सड़क सर्पाकार लहरदार है। सड़क पर इन तीखे घुमाव के कारण चालक की विजिबिलीटी मात्र 50-60 फुट की रहती है। ओवरटेक के समय तो वाहन दिखता भी नहीं। इससे हादसे की आशंका रहती है।
> चढ़ान एवं ढलान-फतेहपुर से हरसावा सर्किल तक तीखे मोड़ के साथ ही खतरनाक उतार चढ़ाव भी हैं।
> नौ किमी के रास्ते में सिर्फ एक स्थान पर दुर्घटना के हिसाब से खतरनाक मोड़ का बोर्ड लगा रखा है। यह भी पेड़ों के बीच छिपा हुआ है।
> जिंदगी से तेज मत दौड़िए
हाइवे पर रफ्तार की लिमिट तय है। छोटे चार पहिया वाहनों के लिए यह 90 किमी प्रति घंटा और भारी वाहन अधिकतम 65 किमी प्रति घंटा तक दौड़ाए जा सकते हैं। स्थिति बिलकुल उलट है।
वाहन चालक 90 के बजाय 100 से भी ज्यादा गति से गाड़ी चलाते हैं। यही स्थिति बड़े वाहनों में है, जो बेलगाम चल रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि कोई वाहन 100 से ऊपर की गति पर दौड़ रहा है तो अचानक कुछ सामने आने पर ब्रेक लगने पर टायर फिसल जाएगा। क्योंकि आम चालक गियर से वाहन नहीं रोक पाता है। यदि गति लिमिट में होगी तो आसानी से वाहन रुक सकता है।