अजमेर.भारतीय जनता पार्टी किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश धनखड़ ने कहा कि मौजूदा कृषि नीति जारी रही तो किसान खेती से किनारा करने लगेंगे। देश का किसान अगर खेती से हटा तो दुनिया का कोई देश भारत की बड़ी आबादी को रोटी नहीं खिला सकता।
सरकार को किसानों की दुर्दशा सुधारने के लिए स्वामीनाथन रिपोर्ट की सिफारिशों को तुरंत लागू करना चाहिए। धनखड़ शनिवार को कलेक्ट्रेट पर आयोजित धरने में मौजूद किसानों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए बनाई गई स्वामीनाथन की रिपोर्ट को लागू नहीं किए जाने के कारण किसानों का जीवन संकट में हैं।
किसान को उसकी फसल का लागत मूल्य तक नहीं मिल पा रहा। बिचौलिए किसानों का हक मार रहे हैं। उन्होंने कहा कि समस्याओं के समाधान की मांग करने वाले किसानों को गोलियां मिल रही हैं। किसानों को उसकी फसल लागत से 50 प्रतिशत अधिक राशि मिलनी चाहिए।
15 साल में देश के ढाई लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं। धनखड़ ने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ, गुजरात सहित भाजपा शासित राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि भाजपा किसानों की समस्याओं के प्रति संवदेनशील है और समाधान नहीं होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
मोर्चे के प्रदेशाध्यक्ष व पूर्व मंत्री सावरलाल जाट ने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों की फसल को समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदा। खेती के लिए बीज, खाद्य व अन्य कृषि सामग्री महंगे दामों पर मिल रही है।
जाट ने कहा कि किसान जिस तरफ करवट लेता है, उसी तरफ सरकार बनती है। केंद्र में बैठे लोग अरबों रुपए का घोटाले कर रहे हैं लेकिन किसानों को देने के लिए पैसे नहीं हैं।
इन्होंने भी किया संबोधित
ब्यावर विधायक शंकरसिंह रावत ने सरकार को गूंगी-बहरी बताया। सरकारी नीतियों से किसानों के साथ ही समाजा का हर वर्ग त्रस्त है। महंगाई ने लोगों की कमर तोड़ दी है। दो साल बाद होने वाले विधानसभा चुनावों में सरकार को परिणाम भुगतने पड़ेंगे।
अजमेर (उत्तर) विधायक पूर्व राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि किसान रात-दिन मेहनत कर अन्न पैदा कर रहा है, लेकिन सरकार की नीतियों के कारण यही वर्ग सबसे ज्यादा परेशान है।
अजमेर (दक्षिण) की विधायक अनिता भदेल ने केंद्र और राज्य सरकार को हर मोर्चे पर विफल बताया। सभा को भाजपा नेता बी पी सारस्वत, पूर्व जिला प्रमुख सरिता गैना, भूपेंद्रसिंह शक्तावत, राजेंद्र रावत, सुमन मंडावरिया व बालूराम शर्मा सहित कई नेताओं ने संबोधित किया।
कलेक्ट्रेट पर नारेबाजी :
किसानों ने स्वामीनाथन रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करने की मांग करते हुए कलेक्ट्रेट पर इकट्ठा होकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने किसानों के हालात के लिए कांग्रेस और केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
पुलिस व कार्यकर्ताओं में झड़प की नौबत
धरना प्रदर्शन में शामिल हुए किसानों ने कलेक्ट्रेट से अजमेर क्लब की ओर जाने वाले मार्ग को जाम कर दिया। हालांकि उन्हें इस मार्ग के कलेक्ट्रेट की बाउंड्री से लगते भाग में धरने की अनुमति थी। वहीं दूसरे हिस्से में यातायात चल रहा था। लेकिन किसानों ने रोडवेज की बस सहित अन्य वाहनों को भी रोक दिया।
मंच से मोर्चा अध्यक्ष सावरलाल जाट उन्हें ऐसा नहीं करने के लिए माइक पर कहते रहे लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। कुछ देर बाद सहायक पुलिस अधीक्षक अजयसिंह रास्ते में बैठे कार्यकर्ताओं से सख्ती से पेश आए। ऐसे में एक बार के लिए तो माहौल बिगड़ गया।
पुलिस और भाजपा कार्यकर्ता के बीच कहासुनी के बाद झड़प की नौबत आ गई। मौके पर पहुंचे सिविल लाइन थाने के सीआई खान मोहम्मद ने समझाइश कर कार्यकर्ताओं को शांत कर रास्ता खुलवाया। सूचना मिलते ही कई पुलिस अधिकारी भी कलेक्ट्रेट पर जा पहुंचे।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर लोकश सोनवाल ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर आरएसी के जवानों को सुरक्षा पैड और हैलमेट लगाकर आने के निर्देश दिए। निर्देशों के लगभग आधे घंटे के बाद आरएसी के जवान भी पूरे बंदोबस्त के साथ जा पहुंचे। धरना समाप्त होने पर नेताओं ने राष्ट्रीय और प्रदेशाध्यक्ष के नेतृत्व में सहायक कलेक्टर भगवतसिंह राठौड़ को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
‘वसुंधरा जिंदाबाद. . .’
सभा में बार-बार वसुंधरा राजे जिंदाबाद के नारे लगते रहे। अधिकांश भाजपा नेताओं ने भाषण में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के शासन काल की तारीफ की। वक्ताओं ने कहा कि राजे की मेहनत और नीतियों से ही विकास होना बताते हुए गहलोत सरकार के कार्यकाल को जमकर कोसा।
कलेक्ट्रेट पर शनिवार को हुए धरने में भाग लेने पहुंचे लोगों की संख्या को को लेकर कई तरह के अनुमान लगते रहे। कलेक्ट्रेट के बाहर बने मंच पर बड़ी संख्या में देहात और शहर के नेताओं सहित ग्रामीण क्षेत्रों के कार्यकर्ता जुटे।
जिले के विभिन्न क्षेत्रों से लोग बसों और अन्य वाहनों से पहुंचे। ट्रैफिक पुलिस ने सभी वाहनों को आजाद पार्क और आस-पास के क्षेत्रों में खड़ा कराया।
यह है स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें
किसानों की फसलों का समर्थन मूल्य तय करने के लिए केंद्र सरकार ने स्वामीनाथन आयोग का गठन किया था। छह साल पहले स्वामीनाथन आयोग ने अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी थी। इसमें विभिन्न फसलों का समर्थन मूल्य को तय करने वाला फार्मूला बनाया गया था।
इसके तहत फसल लागत का 50 प्रतिशत लागत में जोड़कर समर्थन मूल्य तय किया जाना चाहिए। इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि यदि किसी फसल का लागत मूल्य 1200 रुपए है।
लागत मूल्य का 50 प्रतिशत यानि 600 रुपए उसमें जोड़कर 1800 रुपए समर्थन मूल्य होना चाहिए। इसी समर्थन मूल्य पर फसल की खरीद होनी चाहिए। इसके अलावा कृषि मूल्य आयोग व भारत सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीद सुनिश्चित की जानी चाहिए। इसके लिए विधिक व्यवस्था लागू होनी चाहिए।
नहीं आए देहात जिलाध्यक्ष :
सभा में जिला देहात अध्यक्ष नवीन शर्मा की गैरमौजूदगी खासी चर्चा का विषय बनी रही। वहीं शर्मा द्वारा नियुक्त किए गए किसान मोर्चा देहात जिला अध्यक्ष ओम प्रकाश भडाना भी धरने में शामिल नहीं हुए।
दोनों नेताओं ने फोन पर खुद को अजमेर से बाहर होने के कारण धरने में शामिल नहीं हो सकना बताया। वहीं सभा को पवन अजमेरा ने जिला देहात अध्यक्ष की हैसियत से संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन भारतीय जनता युवा मोर्चा शहर जिलाध्यक्ष देवेंद्रसिंह शेखावत ने किया।