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तरकश: सूरज छूने की कोशिश मत करो विकास भैया!

 
Source: Bhaskar News   |   Last Updated 05:21(06/02/12)
 
 
 
 
अमीन के बाद आमीन

अल्पसंख्यक मामलात राज्य मंत्री अमीन खां और विवाद का चोली दामन का साथ हो गया लगता है। एक के बाद एक कई विवादास्पद बयान देकर वे घिर से गए हैं। अजमेर में मस्जिदों को लेकर जो बयान उन्होंने दिया उसका अंत माफीनामे पर जाकर हो गया। बयान से लेकर माफीनामे के बीच कुछ ऐसा भी घटा जो इस बात को और पुख्ता करता है कि कुछ लोगों का जाति धर्म सिर्फ मौके का फायदा उठाना ही होता है।

ऐसे ही कुछ लोग 48 घंटे तक सक्रिय रहे और अमीन खां को यह यकीन दिलाते रहे कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं कहा। अखबार ने बयान तोड़मरोड़ कर पेश किया। लेकिन जिनके सामने बयान दिया, वे इस बात पर कायम थे कि जो छपा, वही तो बयान दिया था। एक समझदार ने अमीन खां को समझाया कि जब मामला आस्था का हो तो नतमस्तक होने या कन्नी काटने में भलाई होती है। सरकार ने भी अमीन खां को यही सलाह दी। लिहाजा आ गया माफीनामा।


इन पर मेहरबानी क्यों?

कांग्रेस के एक नेता ने रविवार को एक सवाल किया है नगर निगम के मेयर कमल बाकोलिया से। सवाल अजमेर क्लब के पास पिछले दिनों तोड़े गए अवैध निर्माण से जोड़कर किया गया है। सवाल करने वाले नेता हैं पूर्व पार्षद सत्यनारायण गर्ग। पत्र लिख कर पूछा है उन्होंने मेयर से, कि भाई साहब अवैध निर्माण तोड़ा, इसके लिए धन्यवाद। मगर उन पर मेहरबानी क्यों कर रखी है जिन्हें अवैध निर्माण हटाने के नोटिस महीनों पहले थमाए जा चुके हैं। पत्र में गर्ग ने कई बड़े निर्माणाधीन कॉमर्शियल कांप्लैक्स के नाम भी लिखे हैं। सवाल जायज है, जवाब मिलना ही चाहिए।

सूरज छूने की कोशिश मत करो विकास भैया

एक हिंदी फिल्म का बहुचर्चित गाना है-कुछ ऐसे बंधन होते हैं, जो बिन बांधे बंध जाते हैं। इसके एक अंतरे की लाइन पर गौर फरमाएं-सूरज छूने की कोशिश में पंछी के पर जल जाते हैं, कुछ ऐसे बंधन होते हैं। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष विकास चौधरी की हालत कुछ ऐसे ही पंछी जैसी है। वे युवा हैं, महत्वाकांक्षाएं भी होंगी, होनी भी चाहिएं। लेकिन ऐसी नहीं कि सूरज छूने की कोशिश करती उड़ान भरी जाए।

धर्मेंद्र चौधरी आदतन अपराधी है, उसका साथ सूरज छूने की कोशिश जैसा ही है। वसुंधरा राजे को चुनरी ओढ़ाने से लेकर नगर निगम जाकर विरोध करने तक का सफर कितना नुकसान पहुंचा रहा है, ये विकास की समझ में आ गया होगा। साथी एक के बाद एक पकड़े जा रहे हैं। वे भी पकड़े जा सकते हैं। इन घटनाक्रमों को सबक के तौर पर देख कर तौबा करनी चाहिए, अन्यथा नुकसान बढ़ सकता है।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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