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कोटा यूआईटी में भी खूब हो रहा भ्रष्टाचार, सजा किसी को नहीं

भास्कर न्यूज | Aug 11, 2012, 05:54AM IST
 
 

कोटा. राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा जेडीए में भ्रष्टाचार के खिलाफ की गई तल्ख टिप्पणी के बाद भास्कर ने यूआईटी में भ्रष्टाचार के मामलों की बारीकी से पड़ताल की तो सामने आया की यहां भी जमीनों व सड़क निर्माण आदि के खेल में घोटाले उजागर होने के बावजूद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो रही है। एक मामले में तो रिश्वत की दोषी महिला बाबू को भूखंड तक आवंटित कर दिया गया।

सरकारी जमीन व सड़क निर्माण आदि के खेल में कोटा यूआईटी भी पीछे नहीं है। यहां कर्मचारियों को रिश्वत लेते हुए पकड़ा जा चुका है। एक बिल्डर व पूर्व सचिव के खिलाफ एसीबी में जांच चल रही है। घटिया निर्माण के कारण कुछ इंजीनियरों को हटाया जा चुका है।

शहर में चल रहे विकास कार्यो का सबसे बड़ा हिस्सा यूआईटी के पास है। विभिन्न प्रोजेक्ट पर यूआईटी 1200 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। इनमें से डिवाइडरों, पार्को व चौराहों के सौंदर्यीकरण जैसे बड़े प्रोजेक्ट सवालों के घेरे में हैं। जमीनों के आवंटन व सड़क निर्माण के खेल में घोटाले तो उजागर हुए लेकिन न्यास प्रबंधन ने कार्रवाई आज तक नहीं की। रिश्वत लेते पकड़ी गई कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई की बजाय यूआईटी उसे भूखंड देकर उपकृत कर रहा है। एक मामले में तो भ्रष्टाचार की कीमत तो दिल्ली के एक ठेकेदार को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। उसकी जान चली गई, लेकिन उसके दोषी जयपुर जेडीए व कोटा यूआईटी के इंजीनियरों को जांच के बाद क्लीनचिट दे दी गई।

पांच इंजीनियरों पर कार्रवाई

शहर में बिजली की केबलों को भूमिगत करने के मामले में ठेकेदार अजय गुप्ता ने यूआईटी के पांच अधिकारियों के खिलाफ एसीबी में शिकायत दी थी। वीडियो फुटेज की सीडी भी दी गई थी, इसके आधार पर तत्कालीन जेडीए निदेशक एसके पंचौली, अतिरिक्त मुख्य अभियंता वीके गोलछा, एक्सईएन जेडीए जेपी सिंघल, एक्सईएन सीपी विजय व एईएन जेपी शर्मा के खिलाफ तक कार्रवाई की गई थी। दिसंबर-10 में हुए यह मामला अभी भी एसीबी में विचाराधीन है।
हालांकि इसमें से कुछ अधिकारियों को जांच के बाद क्लीनचिट दे दी गई है।

करोड़पति रीडर को मामूली सजा

हाल ही में एसीबी ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में यूआईटी के ही तहसीलदार के रीडर ताराचंद सिंघल को पकड़ा था। उसके पांच ठिकानों पर छापे मारे गए, जिसमें दो लाख रुपए नकद व जेवरातों के अलावा जमीन-जायदाद मिली थे। इसमें बाबू को केवल तत्कालीन जगह से हटाकर दूसरी जगह लगाने की सजा दी गई है। यह मामला भी एसीबी में विचाराधीन है।

बस एक नर्सरी बची

तलवंडी क्षेत्र में यूआईटी ने कुछ साल पहले नर्सरी के लिए कौड़ियों के दाम भूखंड आवंटित किए थे। यहां अब केवल एक नर्सरी बची है। शेष भूखंडों पर लोगों ने बड़े शोरूम और हॉस्टल बना लिए हैं। अब नगर निगम इन्हें नियमित करने के प्रयास में लगा है। इसी तरह कुन्हाड़ी क्षेत्र में एक बड़े कॉलोनाइजर के साथ मिलकर यूआईटी के पूर्व सचिव ने मूलभूत सुविधाओं के लिए आरक्षित भूखंडों को रिलीज कर दिया था। इस मामले में अब एसीबी जांच कर रही है।

हटा दिया था इंजीनियरों को

डीसीएम क्षेत्र में करोड़ों रुपए की घटिया सड़कें बनाने का मामला उजागर होने पर तीन इंजीनियरों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
इसमें एक्सईएन एसके सिंघल को उनके विभाग आवासन मंडल में भेजा गया। दो इंजीनियरों को भी हटाया गया। इसमें उन्हें हटाने के अलावा कोई कार्रवाई नहीं हो पाई। सिंघल इस समय आवासन मंडल में कार्यवाहक आवासन आयुक्त हैं।

सजायाफ्ता बाबू को भूखंड

यूआईटी में रिश्वत लेते पकड़ी महिला कर्मचारी ट्रीजा आस्टिन को निलंबित कर दिया गया। इसके बावजूद यूआईटी प्रशासन उस पर मेहरबान रहा। यूआईटी कर्मचारियों को जब भूखंड बांटे गए तो उसे भी आवंटित कर दिया गया। उसने भूखंड लेकर बेच भी दिया। मामला उजागर होने के बाद भी यूआईटी प्रशासन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर पाया।


डिवाइडरों के निर्माण पर मचा हल्ला

शहर में डिवाइडर के सौंदर्यीकरण पर 4 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसमें ठेकेदार प्लानिंग की बजाय मनमर्जी से काम कर रहे हैं। हाल ही में विधायक ने इस मामले में हल्ला मचाया तो यूआईटी ने गुपचुप बैठक कर इंजीनियर्स को जांच के आदेश दे दिए। गुणवत्ता का ध्यान रखने की नसीहत तो दी लेकिन कार्रवाई नहीं की।

अभी कई और भी हैं निशाने पर

यूआईटी में रिश्वत लेने के आरोपी रीडर ताराचंद सिंघल को गिरफ्तार करने के बाद एसीबी ने न्यास के कुछ दूसरे कर्मचारियों को भी अपनी जांच के दायरे में रखा है। उनके खिलाफ गोपनीय जांच चल रही है। हालांकि अभी इसका खुलासा नहीं किया जा रहा। खुलासा होने पर भ्रष्टाचार की और भी परतें खुल सकती हैं।
 
 
 

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