कोटा/उदयपुर.शेखर का शव जलाने की भाटी ने पूरी कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो पाया। भाटी शव को जलाने के लिए दो लीटर केरोसीन, दो बोरी कोयला व लकड़ी लेकर कोटा स्थित फार्म हाउस पहुंचा।
शव को निकालकर कपड़े उतार दिए। लकड़ी बिछाकर लाश रखी और केरोसीन डालकर जलाना चाहा। केरोसीन कम होने से शव नहीं जल पाया। ऐसे में भाटी ने अधजले शव को बोरे में भरकर नांता नहर में डाल दिया।
पुलिस ने बताया कि कोटा से भाटी 27 दिसंबर को अपनी मोटर साइकिल लेकर वापस उदयपुर आया। 27 और 28 दिसंबर को शेखर पांचाल के साथ रूम पर रहा। 31 दिसंबर को शेखर को फोन किया।
शेखर ने डूंगरपुर से आने की बात कहने पर भाटी की आशा फिर जागी। कार लेकर हॉस्टल के नीचे आ गया और फोन कर थर्टी फस्र्ट पार्टी मनाने के लिए धोखे से बुलाया। शराब खरीद कर शेखर को शहर से 20 किमी दूर उभयेश्वर महादेव मंदिर से पहले घाटे में ले गया। यहां पर घाटे में नाले के पास सुनसान जगह कार रोक कर शराब पी। बाद में कार खराब होने का बहाना कर शेखर से धक्का लगवाया।
भाटी ने पीछे से बेसबॉल डंडे से ताबड़तोड़ वार कर शेखर को लहुलुहान कर दिया। प्रतापनगर चौराहे पर उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद मरी हुई अवस्था में शेखर को 76 हाइवे से उदयपुर से कोटा ले गया।
कोटा से पहले शेखर का खून से सना जैकेट और खूद के खून से सने कपड़े बदल दिए। शव को सीट से हटा कर कार के पीछे डिक्की में डाल दिया। यह गाड़ी अपने घर के बाहर खड़ी कर 31 दिसंबर की रात 12 बजे घर जाकर सो गया।
महज 5 हजार 800 रुपए लेकर भागता रहा
पूछताछ में प्रदीप भाटी ने बताया कि वारदात के समय 5 हजार रुपए उसके पास पहले से रखे थे। 4 जनवरी को पुलिस के आने की भनक लगने पर पकड़े जाने के भय से कोटा छोड़ने का निर्णय किया।
इस दौरान अपने साथी कोटा के दादाबाड़ी निवासी मुकेश सोनी से 800 रुपए उधार ले लिए। वह कोटा से बस से जयपुर होते हुए हरिद्वार पहुंच गया। यहां पर पुलिस से चकमा देने और कर्जदारों से मुक्ति पाने के लिए उसने सुसाइड नोट लिख कर बैग में डाल दिया और यह बैग गंगा किनारे डाल दिया।
बिना टिकिट की यात्रा और पकौड़े खाकर दिन गुजारे: भाटी का कहना है कि 4 जनवरी को कोटा से फरार होने के बाद पैसे की तंगी के चलते इसने अधिकतर समय बिना टिकिट के रेल यात्रा की।
इसने हरिद्वार, झालावाड़, मुंबई, गोवा, इंदौर, पूना, महाबलेश्वर, रतलाम, गोवा आदि स्थानों पर फरारी काटी। आखिरकार रुपए खत्म होने पर जुगाड़ करने के लिए कोटा आया और पकड़ा गया।
लोन चुकाने के लिए भाटी ने ली शेखर की जान
कोटा/उदयपुर. लोन चुकाने व मांगने वालो से पीछा छुड़ाने के लिए आरोपी प्रदीप भाटी ने पेसिफिक इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र शेखर पांचाल की अपहरण किया था। भाटी उसे कोटा में अपने फार्म हाउस पर बंधक बनाकर फिरौती मांगना चाहता था। इसी योजना के तहत उसने उदयपुर में शेखर को हॉस्टल से बुलाकर कार में थर्टी फस्र्ट की पार्टी मनाने का ऑफर दिया।
इसके बाद भाटी धोखे से शेखर को उदयपुर से 20 किमी दूर उभयेश्वर महादेवी मंदिर की ओर ले गया। यहां उसने घाटे में ले जाकर बेसबॉल के डंडे से हमला कर शेखर की हत्या कर दी।
साथ ही शव को कार में लेटा कर उदयपुर से कोटा ले आया। दो दिन पहले कोटा से गिरफ्तार प्रदीप सिंह भाटी ने पूछताछ में अनेक खुलासे किए हैं। उसने पुलिस को बताया कि एक करोड़ कर्जा चुकाने का उनके पास साधन नहीं बचा था और बाकीयात मांगने वालों ने रुपए देने को 31 दिसंबर की अंतिम तारीख दे रखी थी।
ऐसे में उसने गलत रास्ता चुन लिया। प्रदीप सिंह भाटी पेसिफिक इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र डूंगरपुर निवासी शेखर पांचाल और उसके ही मित्र हर्षित पांचाल उसकी नजर में मालदार थे। इनके साथ एक ही हॉस्टल में रहने के कारण भाटी इनसे परिचित था।
शेखर के पिता के कुवैत में ज्वेलरी शॉप और हर्षित के पिता के डॉक्टर होने से इन दोनों में से एक को अपहरण कर अपने फॉर्म हाउस ले जाकर बंधक बनाकर रखने और मोटी रकम की फिरौती वसूलने की साजिश भाटी ने रची। अपहरण की साजिश उसने 15 दिन पहले ही बना ली। इसके लिए उसने अपने मित्र महेश गढ़वाल से रिवाल्वर खरीदने के लिए 10 हजार रुपए भी दिए। लेकिन महेश न तो रिवाल्वर दी और रुपए भी हड़प गया।