'प्रभु को पाने के लिए बचपन से करें भक्ति'
Source: Dainik Bhaskar News | Last Updated 08:35(09/02/12)
अजमेर। प्रभु के भजन के लिए कोई उम्र या समय निश्चित नहीं है। प्रभु का भजन तो बाल्यावस्था से ही किया जाना चाहिए। यह विचार आचार्य अकिंचन महाराज ने शास्त्री नगर स्थित संस्कार स्कूल के खेल मैदान में राधिका सेवा संस्थान ट्रस्ट की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान व्यक्त किए। कथा के दौरान महाराज ने बताया कि बुद्धिमान व्यक्ति वो होता है जो यौवन और वृद्धावस्था का विश्वास न करके बचपन से ही प्रभु को प्राप्त करने का साधन करता है। महाराज ने कहा कि जब तक शरीर रूपी घर स्वास्थ्य है, वृद्धावस्था का आक्रमण नहीं हुआ है, इंद्रियों की शक्ति कमजोर नहीं हुई है तब तक अपने आत्म कल्याण का साधन कर लेना चाहिए।
वरना घर में आग लगने पर कुआं खोदने से कोई लाभ नहीं होता। बुधवार को महाराज द्वारा अजामिल चरित्र, प्रह्लाद चरित्र, गजेंद्र मोक्ष, समुद्र मंथन एवं वामन अवतार की कथा सुनाई। इस दौरान वामन भगवान की झांकी भी सजाई गई। राधिका सेवा संस्थान के प्रवक्ता दीपक ने बताया कि गुरुवार को कथा में राम कथा एवं कृष्ण जन्म की कथा होगी।