राज्य सरकार ने विद्युत कंपनियों के लिए केंद्र से 27 हजार करोड़ मांगे
Source: Bhaskar News | Last Updated 01:09(19/01/12)
जयपुर/नई दिल्ली.राजस्थान सरकार ने केंद्र से प्रदेश की विद्युत कंपनियों के लिए एकमुश्त अनुदान और ब्याज मुक्त ऋण के तौर पर 27 हजार करोड़ रु. के पैकेज मुहैया कराने की मांग की। इसके साथ पेयजल परियोजना के लिए 37 हजार करोड़ रु. की भी मांग की गई।
बुधवार को केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की अध्यक्षता में बजट पूर्व राज्यों के वित्त मंत्रियों की बैठक में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने लिखित वक्तव्य में उक्त मांग रखी। बैठक में मुख्यमंत्री गहलोत (जिनके पास वित्त विभाग का प्रभार भी है) का प्रतिनिधित्व राज्य के उद्योग मंत्री राजेंद्र पारीक ने किया।
मुख्यमंत्री ने अपने लिखित भाषण में कहा कि राजस्थान के दूरदराज गांवों में बिजली एवं पानी पहुंचाना महंगा एवं मुश्किल कार्य है। राजस्थान में किसानों के लिए बिजली की दर पिछले तीन वर्षो में नहीं बढ़ाए गए हैं। प्रदेश में सतही और भूमिगत जल की भारी कमी के कारण फसलों की सिंचाई के लिए बिजली का अतिरिक्त व्यय भार सहन करना पड़ता है। इससे विद्युत कंपनियों की माली हालत ठीक नहीं है।
उन्होंने केंद्र से अनुरोध किया कि राज्य के जनजातीय बहुल बांसवाड़ा जिले में अणु बिजलीघर की स्थापना के लिए शीघ्र कार्य प्रारंभ किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि राजस्थान का 60 फीसदी क्षेत्रफल रेगिस्तानी होने तथा राज्य में वर्षा का औसत कम होने के कारण लगभग 74 प्रतिशत आबादी क्षेत्रों में पीने के पानी की गुणवत्ता बड़ी समस्या है।
राज्य में सतही पानी (नर्मदा परियोजना, आईजीएनपी एवं चंबल) पर निर्भर 37,000 करोड़ की परियोजनाएं शुरू करना जरूरी हैं। मुख्यमंत्री ने दिल्ली-मुंबई ‘इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर’ की समुचित उपादेयता के लिए नीमराना के निकट एक एयरपोर्ट स्वीकृत करने की मांग भी की। मुख्यमंत्री ने बाड़मेर में तेल रिफाइनरी की मांग भी दोहराई।
गहलोत ने बताया कि प्रदेश की राजधानी जयपुर में ‘मैट्रो रेल परियोजना’ पर काम शुरू हो गया है। इसकी अनुमानित लागत 10,000 करोड़ रुपए है। उन्होंने अन्य परियोजनाओं के लिए भी अनुदान जल्द मंजूर करने का अनुरोध किया।