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पशुपालकों में ब्रुसेलोसिस विभाग को अलर्ट की तैयारी

Bhaskar News | Feb 09, 2013, 05:01AM IST
 
 

सीकर.वेटरनरी विश्वविद्यालय बीकानेर की पशुविज्ञान प्रयोगशाला से पशुपालकों को चिंतित करने वाली रिपोर्ट आई है। करीब एक दर्जन पशुपालकों के ब्लड सैंपल लेकर ब्रुसेलोसिस बीमारी की आशंका में की गई जांच में आधा दर्जन पशुपालकों में इस रोग के लक्षण मिले हैं। चिंता इसलिए है कि पिछले दिनों डॉक्टरों व कंपाउंडरों की जांच रिपोर्ट से ज्यादा संक्रमण पशुपालकों में मिला है। 
 
सीकर के 139 कंपाउडर -डॉक्टरों की जांच में एक रोगी मिला। जबकि पशुपालकों में अधिकतर में ये लक्षण मिले हैं। फिलहाल प्रयोगशाला की तरफ से राजस्थान पशु चिकित्सा परिषद को इसकी जानकारी दे दी गई। परिषद प्रदेशभर में पशुपालकों को सतर्क करने के साथ विभाग को अलर्ट करने की तैयारी में है।
 
पिछले दिनों सीकर में पशुओं में संक्रामक रोग फैलने के बाद प्रदेशभर में राजस्थान पशु चिकित्सा परिषद ने डॉक्टरों व कंपाउंडरों की जांच करवाई। इसमें सीकर व दौसा में एक-एक कंपाउंडर ब्रूसेलोसिस से पीड़ित मिले। 
 
इसी बीच बीकानेर के वेटनरी विश्वविद्यालय में पशुपालकों के ब्लड सैंपल लिए गए। ऐसा इसलिए किया गया कि यह रोग पशुओं के प्रसव के दौरान फैलता है। प्रदेश में संस्थागत प्रसव की तादाद नाममात्र है। ऐसे में साफ है पशुपालक ही इस काम को अंजाम देते हैं। इसलिए इस बीमारी का खतरा भी पशुपालकों को ज्यादा है। 
 
जांच रिपोर्ट में ऐसा ही हुआ। बीकानेर वेटनरी विवि की पशु विज्ञान प्रयोगशाला प्रभारी डा. अनिल कुमार कटारिया ने बताया कि शुरुआती जांच के लिए बीकानेर इलाके से पशुपालकों के सैंपल की रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट को मौखिक तौर पर राजस्थान पशु चिकित्सा परिषद को बताया दिया है। अब यह सुझाव भेज रहे हैं कि प्रदेश के बाकी इलाकों में भी जांच कराई जानी चाहिए।
 
हां, जांच रिपोर्ट आई है, पशुपालकों को सतर्क करेंगे
 
बीकानेर वेटनरी विवि से जांच रिपोर्ट में बताया गया है कि पशुपालकों में ब्रुसेलोसिस बीमारी का खतरा ज्यादा है। चूंकि प्रदेश के कई जिलों में संक्रामक रोग के मामले मिले हैं। इसलिए पशुपालकों को सतर्क करने के साथ विभाग को अलर्ट किया जाएगा।
 
एसके नवानी, काउंसलर राजस्थान पशु चिकित्सा परिषद
 
क्या है ब्रुसेलोसिस और कैसे फैलता है
 
प्रसव के दौरान हाथों पर दस्ताने, मुंह पर मास्क आदि का प्रयोग नहीं करने से विषाणु मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। यह बीमारी पशु के पेट में मरे हुए बच्चे को निकालते समय ज्यादा फैलती है। संक्रमित पशु का दूध उपयोग करने से भी बीमारी का संक्रमण हो सकता है। इसके शुरुआती लक्षण शरीर में दर्द, थकान व अचानक से दुबलापन आता है।
 
स्टाफ की जांच तो करा ली पशुपालकों का क्या?
 
सीकर में लगातार पशुओं में संक्रमण बीमारी के मामले सामने आ रहे हैं। इस बीच पशुपालन विभाग ने अपने स्टाफ की जांच तो करवा ली। लेकिन पशुपालकों को न तो सतर्क किया जा रहा है और न ही जांच। जबकि सीकर में 95 फीसदी पशुपालक खुद प्रसव करवाते हैं। ऐसी ही स्थिति प्रदेश में है।
 

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