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SATURDAY स्पेशल: कृष्ण न चलते यह चाल तो बदल गया होता महाभारत का अंत!

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राजस्थान एक ऐसा प्रदेश है, जहां कदम-कदम पर गूंजते हैं वीरता के किस्से, बलिदानों के गौरव का बखान करती दिलचस्प कहानियां। उसी राजस्थान का एक और पहलू भी है, जो लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता रहता है। वह है यहां के कुछ ऐसे स्थान, जिनकी अपनी एक खास कहानी है और उस कहानी में छुपा हुआ है एक अद्भुत रहस्य।dainikbhaskar.com अपने पाठकों के लिए लाया है एक ऐसी सीरीज जिसमें हम रहस्य भरे इन स्थानों की कहानियों से रूबरू कराएंगे। SATURDAY SPECIAL नाम की इस सीरीज में आज हम आपके लिए लाए हैं राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटूश्याम जी की कहानी जो अपनी वीरता के कारण महाभारत का युद्ध पलटने का हौसला रखते थे।
 
पढ़िए आखिर क्या है खाटू श्याम की वीर गाथा
 
बात उस समय की है जब पांडवों और कौरवों के बीच महाभारत का युद्ध चल रहा था। उस समय भीम के पुत्र घटोत्कच व नाग कन्या अहिलवती के पुत्र बर्बरीक ने अपनी मां से इस युद्ध में भाग लेने की अनुमति मांगी। बर्बरीक की मां ने उसे युद्ध में भाग लेने की अनुमति देते हुए कहा कि वह युद्ध में उस पक्ष का साथ देगा जो निर्बल होगा। अपनी माता से आज्ञा लेकर बर्बरीक युद्ध के लिए निकल गए। उस समय उसके तरकश में मात्र तीन ही बाण थे जो उन्हें भगवान शिव से वरदान स्वरूप मिले थे। वे इन तीनो बाणों से तीन लोक जीत सकते थे।

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