एक स्थान जहां खुद को बचाने तीन बार आग में कूदी हजारों औरतें!

मेवाड़ की पूर्व राजधानी चित्तौड़ आज भी अपने दामन में इतिहास की अमर कहानी समेटे हुए सैलानियों को अपनी और आकर्षित कर रहा है।चित्तौड़ का निर्माण पांचवीं शताब्दी में चित्रांगद मौर्य के द्वारा किया गया था और उन्ही के नाम पर इसका नामकरण हुआ।
चित्तौड़ आठवीं शताब्दी से सोलहवीं शताब्दी तक मेवाड़ की राजधानी रहा इसके बाद राणा उदयसिंह के द्वारा इसे उदयपुर स्थानांतरित कर दिया गया। चित्तौड़ ने अपे आंगन में तीन बड़े जौहर जलते हुए देखें हैं, पहला जौहर जब अलाउद्दीन खिलजी ने पद्मिनी को हासिल करने के लिए आक्रमण किया तब रानी पद्मिनी ने जौहर जलाया।
दूसरा जौहर जब गुजरात के बहादुर शाह ने आक्रमण किया तब राणा सांगा की रानी कर्णावती ने जौहर जलाया और तीसरा जौहर अकबर के आक्रमण के समय जलाया गया।
आइये वीडियों के माध्यम से जानते हैं बलिदानों की इस धरती का संक्षिप्त इतिहास:





