सूखता मगरा - सुलगता सवाल

उदयपुर.थूर का मगरा इन दिनों सुलगता सवाल दाग रहा है। यह फतहसागर के रानी रोड वाले छोर पर है, जो दिनोदिन सूखता जा रहा है। झील के आसपास कुछ पहाडिय़ां थूर का मगरा से भी ऊंची हैं, लेकिन ये सभी हरी-भरी हैं। सिर्फ मगरे की वनस्पति सूखती जा रही है।
बड़ा सवाल : अभी से ऐसे हालात क्यों
फतहसागर पाल पर टहलने आने वालों का कहना है कि जो पहाड़ी फरवरी तक हरी-भरी दिखाई देनी चाहिए, वह दिसंबर में ही सूख रही है। अमूमन ये हालात तो मई-जून की गर्मी में होते हैं। कुछ लोगों ने सीधे कहा कि या तो वन विभाग ने इस बार पौधे रोपने में कहीं न कहीं कोई कमी रखी है या किसी पर्यावरणीय दुष्प्रभाव के कारण थूर के मगरे पर पेड़-पौधे पनप नहीं रहे।
मगरे और पहाड़ हरे-भरे ही अच्छे लगते हैं
नियमित मार्किंग वॉक के लिए यहां आता हूं और जब एक पहाड़ी नंगी दिखाई देती है तो स्थिति बड़ी अजीब लगती है। चारों ओर हरी-भरी पहाडिय़ां हैं। जिम्मेदारों को इस पर अन्वेषण करना चाहिए। सुनील कुमट, नीमजमाता स्कीम
थूर मगरा का फतहसागर वाला हिस्सा पीला दिखाई देता है, जैसे पेड़-पौधे हैं ही नहीं है। बारिश बीतने के बाद दिसंबर जैसे ठंड वाले महीने में वनस्पति कैसे सूख सकती है?
-अमित माथुर, फतहपुरा
मगरे पर कंटीली झाडिय़ां
इस पहाड़ी पर कंटीली झाडिय़ां ही पनपती हैं। मगरा पथरीला है, इसलिए यहां की मिट्टी पानी को रोक नहीं सकती। ऐसे में कम पानी में चलने वाली कंटीली झाडिय़ां ही लगाई जा सकती हैं। इंद्रपाल सिंह मथारू, डीएफओ
फरवरी में फिर हरा दिखेगा मगरा
सहायक वन संरक्षक सुहैल मजबूर का कहना हैं कि थूर मगरा अभी पीला दिखाई दे रहा है। इसकी वजह यहां सालर, गोदल, फरागंनी आदि पौधें है जिनकी ठंड में पत्तियां गिरने लगती है। फरवरी में दुबारा इन पौधों में नई पत्तियां आने लगेगी। ऐसे में मगरा दुबारा हरा भरा दिखाई देगा।






