मौसम की मार-हो जाएगी बेकार, किसानों को मिला हथियार
Source: पुष्पेंद्र सिंह सो | Last Updated 05:11(31/01/12)
उदयपुर. मौसम चाहे कोई भी करवट ले, किसान हर परिस्थिति से निबटने के लिए पहले से ही तैयार रहेंगे। मौसम के मिजाज को जानकर अब किसान खुद ही अपनी फसल को अंतिम समय तक बचा लेगा।
यह संभव होगा महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि (एमपीयूएटी) द्वारा प्रदेश स्तर पर पहली बार एक हजार किसानों को दिए जा रहे विशेष प्रशिक्षण से।
किसानों को वातावरण में होने वाले परिवर्तन, फसलों पर पड़ने वाले प्रभाव उनका रखरखाव आदि से जुड़ी जानकारियों के साथ विपरीत परिस्थितियों में फसल के लिए आवश्यक उपाय और तकनीकों से रूबरू करवाया जाएगा। एमपीयूएटी के अनुसंधान निदेशक डॉ. एस.आर. मालू ने बताया कि जलवायु परिवर्तन से होने वाले आर्थिक नुकसान को किसान काफी हद तक कम भी कर सकेंगे।
अब तक क्या होता था
डॉ. मालू ने बताया कि अब तक किसानों को जलवायु परिवर्तन के संबंध में सूचनाएं देकर उन्हें फसल बचाने की जानकारी प्रदान की जाती थी। किसान फसल को लेकर गंभीर तो रहते लेकिन व्यवहारिक दृष्टिकोण में वे पिछड़ जाते और अपनी फसलों के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ जाता था।
अब क्या होगा
इस विशेष प्रशिक्षण में किसानों को हर तथ्य का व्यावहारिक रूप समझाया जाएगा। इसके लिए एमपीयूएटी की ओर से भीलवाड़ा, राजसमंद और उदयपुर में तीन गांव भी गोद लिए गए हैं। जिसे इन एक हजार किसानों का प्रशिक्षण स्थल बनाया जाएगा। गोद लिए इन गांवों में किसानों को फसल बचाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
आज से प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण
एमपीयूएटी के अनुसंधान निदेशालय की ओर से इस संबंध में मंगलवार से किसानों को प्रशिक्षण देने वालों का दो दिवसीय प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा। सचिव डॉ. पी.के. सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण में जल संसाधन, कृषि अनुसंधान के विभिन्न विभाग के पदाधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र के अधिकारी, पशुपालन और मछलीपालन से जुड़े वैज्ञानिक आदि हिस्सा लेंगे। प्रशिक्षण सुबह 10 बजे प्रसार निदेशालय के सभागार में शुरू होगा।