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सरकार ही तोड़ रही है अपने बनाए नियम

 
Source: पुष्पेंद्र सिंह सो   |   Last Updated 06:59(20/01/12)
 
 
 
 
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उदयपुर. राज्य सरकार ने ग्रामीण स्वेच्छा सेवा के लिए जो नियम बनाए थे, उन्हें वो खुद ही तोड़ती नजर आ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा की बाध्यता को समाप्त करते हुए अपने समायोजित कर्मचारियों को विशिष्ट एवं प्रभावशाली पद प्रदान करने के हालिया घटनाक्रम सामने आए हैं।

तर्क दिया जा रहा है कि समकक्ष पद नहीं होने के कारण अन्य पदों पर इन्हें समायोजित किया गया है। गौरतलब है कि हाल ही अनुदानित शिक्षण संस्थाओं और कॉलेजों के कर्मचारियों का ग्रामीण स्वेच्छा सेवा अधिनियम के तहत सरकारी समायोजन किया गया था। इसमें ग्रामीण सेवा की बाध्यता की जानकारी देते हुए आवेदन भरवाए गए थे।

पूर्व में भी वित्त विभाग से आदेश : ग्रामीण स्वेच्छा सेवा के लिए पूर्व में राज्य सरकार के वित्त विभाग द्वारा ही आदेश जारी किए गए थे। उसके बाद वित्त विभाग से ही प्रतिनियुक्ति के नाम पर रामावि. चिमनपुरा की सुप्रिया अग्रवाल के लिए 13 जनवरी को आदेश जारी किए।

इस मामले में वित्त विभाग की दोहरी नीति नजर आती है। उसके बाद राज्य सरकार के उच्च पदस्थ अधिकारियों ने भी प्रतिनियुक्ति के नाम पर प्रो. पंवार के आदेश किए।

संकट क्या?

सरकार के सामने अब समायोजित हुए 750 अनुदानित व्याख्याताओं की प्रतिनियुक्ति को लेकर भी संकट मंडरा सकता है। पूर्व में प्रतिनियुक्ति की परिवेदनाएं अब तक पड़ी हैं, जिसे लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। सामने आए इन दो मामलों के बाद प्रतिनियुक्तियों के नाम पर गहन संकट खड़ा हो सकता है। सरकार ग्रामीण स्वेच्छा सेवा के नियमों को कैसे साधेगी?

इनका कहना है...

आपके माध्यम से मामला जानकारी में आया है। यदि नियम विरुद्ध कार्य हुए हैं, तो उसकी जांच करवाई जाएगी।

- डॉ. दयाराम परमार, उच्च शिक्षा राज्यमंत्री

ग्रामीण स्वेच्छा सेवा के नोटिफिकेशन में है कि यदि हमारे समकक्ष कोई पद नहीं होता है, तो राज्य सरकार अन्य किसी पद पर समायोजित कर सकती है। रही बात ग्रामीण क्षेत्र की तो टीआरआई में रूरल डवलपमेंट को लेकर ही कार्य होंगे। सुप्रिया अग्रवाल को भी किशनगढ़ केंद्रीय विवि में लगाया गया है।

-प्रो. विजय सिंह पंवार, निदेशक, टीआरआई, उदयपुर

मुझे केंद्रीय विश्वविद्यालय किशनगढ़ लगाया गया है, जिसका अंग्रेजी विभाग बांदस ऊदरी जिला अजमेर में है, जो ग्रामीण क्षेत्र है।

- सुप्रिया अग्रवाल, समायोजित हुई शिक्षाकर्मी

चिमनपुरा, जयपुर की अनुदानित कर्मी सुप्रिया अग्रवाल को केंद्रीय विवि किशनगढ़ में अंग्रेजी व्याख्याता लगाया गया। जो सरकार द्वारा बनाए गए ग्रामीण स्वेच्छा सेवा बाध्यता के नियम विरुद्ध है।

उदयपुर में प्रो. विजयसिंह पंवार को टीआरआई का निदेशक बनाया गया है। जबकि इनका सरकारी समायोजन ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा के लिए हुआ था। इन दोनों मामलों में नियम तोड़े गए।

क्या है नियम

ग्रामीण स्वेच्छा सेवा के तहत सरकार ने नियम बनाया था कि जिन कर्मचारियों का अनुदानित शिक्षण संस्थाओं या कॉलेज से सरकारी समायोजन किया जा रहा है, उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों में रिक्त पड़े पदों पर ही सेवाएं देनी होंगी। कर्मचारी इसे बाध्यता या अनिवार्यता समझें।

कैसे तोड़े नियम

सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों की सेवा की बाध्यता को लेकर नियम बनाए थे, उन्हीं के विपरीत जाकर उन्होंने समायोजित हुए कर्मचारियों को शहरी क्षेत्र में ही उच्च पदों पर आसीन कर दिया है।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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