हमारे लोकतांत्रिक समाज का यह क्रूर और आक्रामक चेहरा स्तब्ध करने वाला है। चिंताजनक यह है कि इस वीभत्स वारदात को अंजाम देने वाले न केवल बेखौफ हैं, बल्कि तालिबानी हिंसा को सही भी ठहरा रहे हैं। ऐसे में बुनियादी सवाल यह है कि यह हिंसा और बर्बरता हमें कहां ले जा रही है?
मैं चिल्लाता रहा। मेरे हाथ मत काटो। मेरे तीन छोटे बच्चे हैं। मां-बाप बूढ़े हैं। मेरे चिल्लाने की आवाज सुन कुछ लोग वहां आए, लेकिन किसी की हिम्मत नहीं हुई कि मेरी मदद करे। वे दरिंदे मुझे मारकर ही दम लेना चाहते थे। उनमें से कुछ मेरे ऊपर बैठ गए। कुछ ने हाथ लकड़ी के फंटे पर रखे और जानवर की तरह कुल्हाड़े से काट डाले। मेरे कटे हाथ उन्होंने झोले में डालकर अपने पास रख लिए और धक्का मारकर मुझे घर से बाहर कर दिया।
मैं बहते खून और गश खाते हुए जैसे-तैसे उन दरिंदों के घर से अपने घर पहुंचा। मेरे हाथ कटे देख कर मां-बाप बेहोश हो गए। पास ही रहने वाला एक युवक ने एंबुलेंस बुलाई। गांव से मुझे सपोटरा ले गए। वहां से एसएमएस अस्पताल भेज दिया। डॉक्टर बार-बार मेरे कटे हुए हाथों के बारे में पूछ रहे हैं। अब वो हाथ कहां से लाऊं।
मेरे हाथ ही नहीं कटे, जीवन ही कट गया। सपना था बच्चों को पढ़ा-लिखा कर बड़ा आदमी बनाने का। मगर सारे सपने टूट गए। मेरी मां के आंखों के आंसू नहीं थम रहे। बूढ़े पिता को गांव में खाना खिलाने वाला कोई नहीं है। रिश्तेदारों से उधार मांग कर मां रुपए लेकर आई है। अब वो भी खत्म हो गए। मेरा आठ साल का बेटा हंसराज मेरे पास आकर पूछता है पापा आपके हाथ कहां गए। मुझे गुस्सा आता है, लेकिन गुस्सा दिखाने वाली मुट्ठियां नहीं रही। जिंदगी के मायने ही खत्म हो गए हैं।
10 घंटों में जोड़ा जा सकता है कटा हाथ
'कटे हुए हाथ को बर्फ या ठंडी चीज पर रख दें, तो वह 10 घंटे तक सुरक्षित रह सकता है। उसे 10-12 घंटे में वापस जोड़ा जा सकता है। अगर व्यक्ति का पंजे का हिस्सा हो तो यह समय और ज्यादा हो सकता है। ज्यादा समय बीत जाने पर अंग के टिशू मर जाते हैं।'
—जीएस कालरा, एचओडी प्लास्टिक सर्जरी, एसएमएस अस्पताल
रिपोर्ट : राजेंद्र गौतम
फोटो : राजकुमार शर्मा
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आगे तस्वीरों में पढ़िए, 'मेरे लाल ने क्या बिगाड़ा था उन दरिंदों का' साथ ही न पप्पू के कटे हुए हाथ मिले, न काटने वाले...