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सुरक्षा नियमों से दूरियां, बढ़ा रही मौत से नजदीकियां
पुष्पेंद्र सिंह सोलंकी | Jan 06, 2013, 06:18AM IST
उदयपुर. जिले में संचालित कई खदानों में सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम नहीं हैं। जिम्मेदार विभाग भी लापरवाह हो चला है। निरीक्षण के नाम पर कोरी कार्रवाई की जा रही है। खदान मालिकों और जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के कारण श्रमिकों को सुरक्षा व्यवस्था के इंतजामों से दूर रहना पड़ रहा है। खान विभाग और खान सुरक्षा निदेशालय के मध्य बढ़ती दूरियां भी इसका प्रमुख कारण हैं। इससे न खदानों की समय पर जांच होती है और न प्रभावी कार्रवाई।
रिस्की खदानों की सुध नहीं : खदानों में सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा खान विभाग और खान सुरक्षा निदेशालय का है।
जबकि इन दोनों विभागों में तालमेल का अभाव है। इस बात की खान विभाग के अधिकारियों ने भी पुष्टि की है। बताया गया कि जब खान विभाग द्वारा नियम बनाए जाते हैं तो निदेशालय उस पर नए उप नियम बना देता है। यही कारण है कि रिस्की खदानों में अब तक किसी तरह के पुख्ता इंतजाम नहीं हो पाए हैं।
दिखावा करते हैं खान मालिक
खान विभाग के निदेशक भवानीसिंह देथा कहते हैं कि कई खान मालिक सुरक्षा इंतजाम तो जुटा लेते हैं, लेकिन उनका उपयोग श्रमिकों को नहीं करने देते हैं। इसके लिए हम नियमित रूप से गश्त करते हैं, कई बार ऐसे मामले पकड़े भी हैं। समझाइश भी की, लेकिन खान मालिक अपनी मनमर्जी चलाते हैं। खान सुरक्षा निदेशालय का जिम्मा बनता है कि ऐसी इकाइयों के प्रति सख्त रवैया रखे।
17 जून के हादसे से सबक लेते तो बच जाती मजदूरों की जान
हिंदुस्तान जिंक के दरीबा संयंत्र में हुए हादसे के लिए सिर्फ कंपनी प्रबंधन ही जिम्मेदार नहीं। छह महीने पहले इसी संयंत्र में छह जान लेने वाले हादसे में अगर पुलिस और प्रशासन की ओर से कड़ी और त्वरित कार्रवाई की गई होती, तो शायद पुनरावृत्ति न होती। पिछले साल 17 जून को हुए हादसे की अब तक जांच पूरी नहीं हो पाई है। तमाम जिम्मेदार एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ने की कोशिश में हैं। सुरक्षा खामियां बनी रहने से आए दिन ऐसे हादसे हो रहे हैं। इधर, शुक्रवार के हादसे में मृत दोनों श्रमिकों का शनिवार को अंतिम संस्कार हुआ। उदयपुर अस्पताल में भर्ती सभी 10 लोगों की छुट्टी हो गई है।






