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खतरनाक लापरवाही : मगरमच्छ की आंख और मुंह में गया रंग

Bhaskar News | Dec 11, 2012, 03:36AM IST
खतरनाक लापरवाही : मगरमच्छ की आंख और मुंह में गया रंग
उदयपुर.  गुलाबबाग जंतुआलय में पुताई के दौरान खतरनाक लापरवाही हो रही है। मगरमच्छ के बाड़े का उदाहरण सामने है। यहां नीले रासायनिक रंग की पुताई इस तरह की गई है कि मगरमच्छ के मुंह, पेट और दांतों पर नीला रंग लग गया।
 
केमिकल साइंटिस्ट डॉ. सीमा चौधरी के मुताबिक पेंट में व्हाइट स्प्रिट और कई आर्गेनिक कंपाउंड होते हैं। इनसे सबसे ज्यादा नुकसान आंखों, त्वचा और फेफड़ों को होता है। मगरमच्छ अंधा भी हो सकता है।
 
जयपुर के वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. कैलाश सामर कहते हैं कि यदि रंग रोगन करना है तो पहले जानवरों को शिफ्ट करना जरूरी है। रंग हो जाने के दो दिन बाद उन्हें वापस शिफ्ट किया जाना चाहिए। जानवरों के पिंजरों में ही रहने के कारण उनके श्वसन तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। रही बात मगरमच्छ की तो उसे भी शिफ्ट किया जा सकता है।
 
और किया यह : गुलाब बाग प्रबंधन ने मगरमच्छ को शिफ्ट नहीं किया। जब वो सुबह धूप में जाता तो दूसरी तरफ रंग रोगन किया जाता। इसी तरह शाम को धूप की दिशा बदल जाने के बाद विपरीत दिशा में कलर करते। ऐसा कर के रंग रोगन करने वालों की सुरक्षा का भी ख्याल नहीं रखा गया। यदि मगरमच्छ अचानक हमला कर देता तो उसे बचाने वाला भी कोई नहीं रहता।
 
ऑयल पेंट का इस्तेमाल
 
गुलाब बाग के 26 पिंजरों में एक नामी कंपनी के ऑयल पेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो विशेषज्ञों की नजर में वन्यजीवों के स्वास्थ्य के लिए घातक है। जू के कई पिंजरों में स्नोसॅम (वाल पुट्टी कलर) भी जारी है। जिसकी घिसाई के कारण पूरे दिन धूल कण हवा में होते हैं। हालांकि स्नोसॅम होने वाले पिंजरों से जानवरों को शिफ्ट कर लिया गया है।
80 हजार में दिया ठेका
 
 
गुलाबबाग के 26 पिंजरों के रंग रोगन का ठेका महज 80 हजार रुपए (रंग सहित) में दिया गया है। यही कारण है कि रंग रोगन करने वाले भी अपनी मनमर्जी के मालिक बने हुए हैं। मगरमच्छ के पिंजरे में उतरकर रंग करना और यहां तहां रंग गिरा देने के नजारे आसानी से देखे जा सकते हैं। कुछ पिंजरों में स्नोसॅम तो कुछ में ऑयल पेंट जारी है।
 
 
सीसीटीवी दुरुस्त करने के निर्देश
 
 
जू प्रशासन ने परिसर में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों को सुचारू रूप से सही करने के निर्देश जारी किए हैं। कार्यवाहक वन्य जीव प्रतिपालक सतीश शर्मा ने बताया कि सीसीटीवी कैमरे शुरू करने के साथ ही रात्रिकालीन गश्त भी बढ़ा दी है। सभी वन कर्मियों को पाबंद किया गया है कि उनके चार्ज में आ रहे पिंजरों और वन्यजीवों की पूरी देखभाल करें।
 
सवाल जो अब तक अधूरे
 
 गत दिनों गायब हुए 23 लब बर्ड के रहस्यमय से गायब होने के अब तक खुलासा नहीं हो पाया है।
 पिंजरे से निकलकर बंदर ने पर्यटक पर हमला बोला। उसके पीछे क्या कारण रहे।
 
वर्तमान में क्या हालात
 
 ऑयल पेंट कर रहे श्रमिक जहां-तहां पेंट गिरा रहे हैं। पिंजरों की फर्श पर भी यही हालात है।
 रंग रोगन के बाद खाली डिब्बों को भी इधर-उधर फेंका जा रहा है।
 वन्यजीवों के पीने के पानी को न ढंका जा रहा है और न कोई बंदोबस्त किए जा रहे हैं।
 
 
नुकसान नहीं है
 
 मगरमच्छ को शिफ्ट नहीं किया गया। पेंट करने वालों की गलती के कारण मगरमच्छ पर कलर लगा है। हालांकि उससे कोई नुकसान नहीं है। सीसीटीवी कैमरे दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं तथा पुराने प्रकरणों की जांच जारी है।
 
सतीश शर्मा, कार्यवाहक, वन्य जीव प्रतिपालक, गुलाबबाग, उदयपुर
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