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संगीत के जुड़ाव ने इन्हें जोड़ा, इन्होंने देश को जोड़ दिया

 
Source: Bhaskar News   |   Last Updated 10:04(12/01/12)
 
 
 
 

उदयपुर.महाराणा कुंभा संगीत परिषद की पांच दशक पुरानी गौरवमयी यात्रा के दौरान कई उतार-चढ़ाव आए। शास्त्रीय संगीत के मोहभंग के दौर में मेवाड़ के चंद लोगों ने इसे जीवंत करने का बीड़ा उठाया। इन लोगों ने लंबे संघर्षो के बाद इस संस्था और समारोह को इतनी भव्यता दी कि देशभर के ख्यात फनकार यहां आने लगे और आम लोगों में भी शास्त्रीय संगीत से जुड़ाव बढ़ता गया। अब गोल्डन जुबली की वेला पर संस्थापक सदस्यों ही नहीं उनके परिवारजन भी अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।

महाराणा कुंभा संगीत परिषद से जुड़े सदस्यों ने बताए संस्मरण

पापा का लगाव था, मैं भी जुड़ गया

संस्थान से जुड़े दिनेश माथुर बताते हैं कि महाराणा कुंभा संगीत परिषद के संस्थापक सदस्य स्व. मुरली नारायण माथुर का संस्थान से तन मन धन से जुड़ाव रहा है।

संस्थान के माध्यम से शास्त्रीय संगीत और इससे जुड़े कलाकारों को मंच प्रदान करने के लिए वे लगातार प्रयासरत रहे। संस्थान में प्रचार प्रसार सचिव के रूप में कार्यरत दिनेश माथुर का कहना है कि पापा के संस्थान के प्रति समर्पण को देख मैं स्वयं को अलग नहीं रख पाया।

माथुर की स्मृति में होता है कलाकारों का सम्मान

संस्थापक सदस्य रहे मुरली नारायण माथुर की स्मृति में संस्थान मंच से प्रतिवर्ष एम.एन. माथुर सम्मान एक कलाकार को दिया जाता है। यह सम्मान महाराणा कुंभा संगीत समारोह में प्रदान किया जाता है। इसके तहत इस वर्ष डॉ. सोनल मानसिंह को सम्मानित किया जाएगा। इस सम्मान के पीछे संस्था से लंबे समय से जुड़े सदस्य के प्रति हर वर्ष श्रद्धांजलि देना है।

चार दशक से जुड़ा हूं

संस्थान के मानद सचिव डॉ. यशवंत कोठारी का कहना है कि काफी लंबा समय हो गया है संस्थान से जुड़े होने का। संस्थान भवन के लिए वे तीन केस तक लड़ चुके हैं।

आखिरकार संस्थान के पक्ष में निर्णय आया तो इतनी खुशी हुई कि शब्दों में नहीं बांधा जा सकता। डॉ. कोठारी कहते हैं कि कुंभा संगीत समारोह में लगातार कलाप्रेमियों की जिस प्रकार से संख्या बढ़ रही है उसे देखकर उदयपुर में एक बड़ा कन्वेशन हॉल बनना चाहिए, जहां दो हजार से अधिक लोग एक साथ बैठ सकें।

सुबह हो गई पता नहीं चला

संस्थान के उपाध्यक्ष आर.एफ. हिंगड़ का कहना है कि वो दिन आज भी याद है जब पंडित औंकार नाथ के गायन के साथ पं. चतुरलाल की तबले पर संगत सुनते हुए सुबह हो गई और पता हीं नहीं चला। संस्थान की ओर से संगीत समारोह अनवरत 49 वर्षो से जारी है। पिता भाई भगवान के साथ संगीत समारोह में जाने का मौका मिलता रहा। संस्थान से लगाव इस प्रकार का हो गया कि आज इसकी कार्यकारिणी में शामिल हूं।

जब उड़ी 100 किलो गुलाल

महाराणा कुंभा संगीत परिषद के उपाध्यक्ष एवं कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ.के एन नाग ने कहा कि अमेरिका से आने के बाद मैं भी इस संस्थान से जुड़ गया और आज तक जुड़ा हूं। मुझे आज भी वो कार्यक्रम याद है जब सितारा देवी ने एक कार्यक्रम में 100 किलो गुलाल की मांग की थी। होली से पूर्व आयोजित समारोह में जब सितारा देवी की नृत्य प्रस्तुति में गुलाल उछली तो सभी दर्शक रोमांचित हो उठे। यो दृश्य आज भी जेहन में ताजा है।

युवाओं को जोड़ा परिषद ने

परिषद से जुड़े देवेंद्र हिरण का कहना है कि कुंभा संगीत परिषद ने युवाओं को भी जोड़कर भारतीय शास्त्रीय संगीत को जानने का मौका दिया। परिषद में युवा पदाधिकारी के रूप में कार्य कर रहा हूं। संस्थान के माध्यम से पं. जाकिर हुसैन, पं. हरिप्रसाद चौरसिया, शुभा मुद्गल जैसे ख्यातनाम कलाकारों से न केवल रूबरू होने का बल्कि उनकी संगीत के प्रति गहराई को भी समझने का मौका मिला।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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