निषेध क्षेत्र में निर्माण का मामला: कार्रवाई के लिए प्रशासन को चाहिए दो महीने

उदयपुर.निषेध क्षेत्र में हुए निर्माण को तोडऩे के मामले में अब तक प्रशासनिक और स्थानीय निकाय स्तर पर कोई तैयारी नहीं है। जो कार्य सात दिनों की समयावधि में हो जाने चाहिए थे, उन पर भी कोई विचार नहीं किया गया है।कलेक्टर विकास एस भाले कहते हैं कि आदेश की पालना के लिए कम से कम 2 माह का समय चाहिए।
हाल ही नगर परिषद आयुक्त इस संबंध में जोधपुर गए हैं। इधर, नगर परिषद और यूआईटी ने हाईकोर्ट के आदेशों की पालना में 15 दिनों का नोटिस जारी किया है, लेकिन कार्रवाई को लेकर तैयारी नाकाफी है। 5 नवंबर को नोटिस की मियाद भी पूरी हो जाएगी।
जनप्रतिनिधियों व सरकार से उम्मीदें बढ़ी
पहले कहा था-समय पर होगी कार्रवाई
प्रशासन: जिला कलेक्टर विकास एस भाले ने 21 अक्टूबर को ली बैठक में कहा था कि 15 दिन का नोटिस दो, नहीं माने तो अवैध निर्माण को गिरा दो। उसके बाद अब वे भी हाईकोर्ट से समय बढ़वाने की बात कर रहे हैं।
यूआईटी:यूआईटी ने आदेशों की पालना में नोटिस जारी कर दिए, लेकिन कोई विशेष तैयारी नहीं है। यूआईटी सचिव पहले कह रहे थे कि आदेशों की निश्चित समयावधि में पालना होगी। उसके बाद कहने लगे समय बहुत कम है।
परिषद: सभापति, आयुक्त आदि ने हाईकोर्ट के आदेशों को लेकर पूर्व में सारी कार्रवाई करने की बात कही, लेकिन वर्तमान में स्थिति यह है कि इनके पास कोई स्पष्ट जवाब भी नहीं है।
अब तक क्या हुआ
27 सितंबर > हाईकोर्ट ने नो कंस्ट्रक्शन जोन में अवैध निर्माण तोडऩे के आदेश दिए।
2 अक्टूबर > नगर परिषद द्वारा कोर्ट में पेश सूची जारी की।
3 अक्टूबर > संभागीय आयुक्तव कलेक्टर से मिले प्रभावित लोग
18 अक्टूबर > झीलों को नो प्लास्टिक जोन बनाने का निर्णय।
21 अक्टूबर > प्रभावित लोगों ने जनसमर्थन के लिए निकाली रैली।
22 अक्टूबर > कलेक्टर ने कहा नोटिस दो, नहीं माने तो गिरा दो अवैध निर्माण।
23 अक्टू. > यूआईटी ने जारी किए 73 लोगों को नोटिस।
25 अक्टूबर > एक और गोपनीय सूची सामने आई।
26 अक्टूबर > प्रशासन, स्थानीय निकायों ने समयावधि मांगने के लिए हाईकोर्ट में अर्जी लगाई।






