बुरी नीयत रखने वालों को सिखाया सबक
प्रणति तिवारी
नई दिल्ली. वीरता या साहस की कहानियां पढऩे में भले ही रोमांच पैदा कर देता है, लेकिन इस कदम पर चलने से पहले बड़े बड़े लोग पस्त हो जाते हैं। लेकिन कई बार नाबालिग किशोरियां भी साहस का ऐसा परिचय देती हैं कि सुनने वालों के होश उड़ जाते हैं। कुछ ऐसा ही कारनामा किया है 16 वर्ष की आकांक्षा और 17 वर्ष की रेनू ने।
जहां आकांक्षा ने अपने कराटे के बल पर चार बदमाशों को धूल चटा दी, वहीं रेनू ने अपनी सूझबूझ का परिचय देते हुए न केवल खुद को शारीरिक शोषण से बचाया, बल्कि कई मासूम बच्चों की भी मदद की। साहस का यह उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए रेनू को गीता चोपड़ा पुरस्कार वहीं कराटे एक्सपर्ट छत्तीसगढ की सोलह वर्षीय आकांक्षा गोते को बापू गैधानी पुरस्कार के लिए चुना गया है।
कराटे एक्सपर्ट आकांक्षा के अनुसार, पिछले साल दो जून की रात जब वह अपने पिता के साथ घर लौट रही थीं तो दो बाइक पर सवार चार बदमाशों ने रास्ते में रोकर दुव्र्यवहार किया। इससे पहले कि चारों बदमाश कुछ कर पाते, पिता के इशारे पर आकांक्षा उनपर टूट पड़ी। इस किशोरी ने तीन बदमाशों को पीट-पीटकर बुरा हाल कर दिया जबकि उसके पिता ने एक बदमाश को पकड़े रखा।
पुरस्कार लेने दिल्ली पहुंची आकांक्षा बताती हैं कि वह पिता के सतर्क किए जाने पर यह जान गई थीं कि उन्हें डरना
नहीं है और परिस्थितियों का डटकर सामना करना है। 16 दिसंबर को दिल्ली में हुए वसंत कुंज इलाके में हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले पर आकांक्षा का कहना है कि अब लड़कियों को आत्मरक्षा के लिए सक्षम बनाना बहुत जरूरी है। इसके लिए हर लड़की को बचपन से ही कराटे सीखना चाहिए।
वहीं, बालिका श्रेणी में सबसे जांबाज बालिका पुरस्कार गीता चोपड़ा अवार्ड के लिए चुनी गई दिल्ली की 17 वर्षीय रेनू के अदम्य साहस और सूझबूझ से न सिर्फ खुद को शोषण से बचाया बल्कि कई ऐसे बच्चों की भी जिंदगी बचाई जो एक बाल गृह के अंदर लगातार शोषित किए जा रहे थे। राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के आयोजकों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, रेनू ने बाल गृह के मालिक, कर्मचारी, और संबंधियों के अमानवीय कृत्यों का खुलासा किया और चाइल्ड वेलफेयर से इसमें मदद मांगी। चाइल्ड वेलफेयर के आदेश के बाद बाकी बच्चों को भी वहां से छुड़ाया गया। जांच में पता चला कि बाल गृह में बच्चों के शारीरिक और यौन शोषण, बच्चों को बेचने, नए तरीकों से सजा देने के अलावा जबरन काम कराया जाता था।
(फोटो- राजसमंद की घटना के विरोध में बंद शहर के बाजार)