सरपंच ने स्टांप पर लिखा, नहीं लूंगा रिश्वत
Source: निखिल कोठारी | Last Updated 04:46(09/02/12)
गोगुंदा (उदयपुर). जिले के तिरोल सरपंच प्रतापसिंह ने इस पद पर रहते हुए रिश्वत नहीं लेने की लिखित में शपथ ली है। साथ ही इंदिरा आवास मुहैया कराने के बदले कुछ लोगों से पैसे लेने और वापस लौटाने की बात को कबूल किया है। दरअसल, गांव वालों ने सरपंच पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाते हुए दबाव बनाया तो सरपंच ने उन्हें स्टांप पर रिश्वत नहीं लेने का शपथ पत्र दे दिया।
ग्रामीणों द्वारा गोगुंदा तहसील के तिरोल सरपंच प्रताप सिंह के खिलाफ की गई अवैध वसूली की शिकायत के बाद दिसंबर में जांच शुरू हुई थी, लेकिन ठोस कार्रवाई अभी तक नहीं हो पाई। सरपंच के खिलाफ इंदिरा आवास योजना के तहत गांव के हीरालाल, हमेर सिंह, किशोर सिंह, सवा बाई पत्नी हमेर लाल, देवली बाई पत्नी मोडा राम, भेरा पुत्र तख्ता, अंबा पुत्र देवा, प्रतापी बाई पत्नी लालपुरी आदि से अवैध वसूली करने का आरोप लगाया गया था।
ग्रामीणों ने इसकी शिकायत कलेक्टर से की थी। इसके बाद कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए थे। गोगुंदा पंचायत समिति के विकास अधिकारी अतुल जैन ने 8 दिसंबर 2011 को पीड़ितों के बयान लिए और 14 दिसंबर-11 को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), जिला परिषद को भेज दिए थे। इधर, सीईओ के अनुसार, जिला परिषद की जांच में ग्रामीणों ने सरपंच के खिलाफ रिश्वत लेने के आरोप से इनकार कर दिया है।
सरपंच ने क्या लिखा है स्टांप पर
‘मैं, प्रताप सिंह पिता पदम सिंह, ग्राम पंचायत तिरोल के सरपंच पद पर कार्यरत हूं। मैंने हीरालाल, हमेर सिंह, किशोर सिंह, सवा बाई पत्नी हमेर लाल, देवली बाई पत्नी मोडा राम, भेरा पिता तख्ता, अंबा पिता देवा, प्रतापी बाई पत्नी लालपुरी से इंद्रा आवास के तहत रुपए लिए थे जो सभी व्यक्तियों को वापस लौटा दिए, जिनका ऊपर नाम है। मेरे खिलाफ इन्होंने जिला कलेक्टर को शिकायत की थी। यह शपथ पत्र लोगों के लिए लिखा है। मैं इस पद पर रहते हुए कभी रिश्वत नहीं लूंगा। यदि लूंगा तो इस पद से बेदखल करें, मुझे मंजूर होगा।’ प्रताप सिंह, सरपंच, तिरोल पंचायत