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उदयपुर में ही मार दिया था शेखर को

 
Source: Dainikbhaskar news   |   Last Updated 04:47(08/02/12)
 
 
 
 
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उदयपुर. पेसिफिक कॉलेज के छात्र शेखर पांचाल की अगवा होने के पहले ही दिन (31 दिसंबर) को उदयपुर से 20 किमी दूर उभयेश्वरजी घाटे में हत्या कर दी गई थी। इसका खुलासा उसने पुलिस गिरफ्त में आने के तीसरे दिन मंगलवार को किया। इसके बाद शेखर के शव को कार में डालकर कोटा ले गया था।

अभियुक्त प्रदीपसिंह भाटी थर्टी फस्र्ट की पार्टी के बहाने शेखर को बोहरा गणोशजी क्षेत्र से ले गया था। एक करोड़ रुपए का कर्ज चुकाने के लिए प्रदीप ने वारदात की थी। पहले उसका इरादा था कि शेखर को कोटा में अपने फार्म हाउस पर बंधक बनाकर फिरौती मांगी जाए।

दो दिन पहले कोटा से गिरफ्तार प्रदीप सिंह भाटी ने रिमांड के दौरान बताया कि एक करोड़ कर्जा चुकाने का उनके पास विकल्प नहीं बचा था। आखिरकार उसने गलत रास्ता चुन लिया था। पेसिफिक इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र डूंगरपुर निवासी शेखर पांचाल और उसके ही मित्र हर्षित पांचाल प्रदीप की नजर में मालदार थे। ये अच्छी तरह से परिचित भी हो चुका था।

वह जानता था कि हर्षित के पिता डॉक्टर और शेखर के पिता के कुवैत में ज्वैलरी शॉप के मालिक है। वो इन दोनों में से एक को अगवा कर मोटी फिरौती वसूलने की कोशिश में था। अपहरण की साजिश उसने 15 दिन पहले ही बना ली थी।

कैसे चला घटनाक्रम

=18 दिसंबर को प्रदीपसिंह उदयपुर आकर बोहरा गणोश इलाके में तेजस्व हॉस्टल में हर्षित पांचाल के रूम में रहा था।
-हर्षित को ज्यादा शराब पिला कर कोटा ले जाने का प्लान बनाया था, लेकिन उसका भाई होने से सफल नहीं हुआ।
-कार को उदयपुर रेलवे स्टेशन पार्किग में रख कर सवाई माधोपुर अपने ससुराल चला गया था।
=कोटा से 27 दिसंबर को बाइक से उदयपुर आया और 27 और 28 दिसंबर को शेखर पांचाल के साथ रूम पर रहा।
31 दिसंबर दोपहर को भी हर्षित का अपहरण करना चाहा, लेकिन विफल रहा।
-इसी दिन शेखर डूंगरपुर से उदयपुर आ गया था। प्रदीप ने दोपहर ढाई बजे उससे बात की।
-कार लेकर हॉस्टल आया और थर्टी फस्र्ट पार्टी मनाने के लिए ले गया।
-चेतक सर्कल से शराब खरीद कर शेखर को उभयेश्वर महादेव मंदिर से पहले घाटे में ले गया।
-नाले के पास सुनसान जगह शराब पी।
-आरोपी ने कार के खराब होने का नाटक कर शेखर से कार को धक्का लगवाया। -
-शेखर कार का बोनट खोल कर देख रहा था तभी पीछे से आकर बेसबॉल डंडे से सिर पर दो वार किए।
-शेखर के नीचे गिरने के बाद भी सिर पर ताबड़तोड़ वार बेसुध कर डाला।
-शेखर को कार में आगे सीट पर लिटाकर सीटबेल्ट लगा दिया और ग्लास चढ़ा दिए।
-शेखर के दोनों मोबाइल बंद कर दिए और बैटरी निकाल दी।
प्रतापनगर चौराहे आते-आते शेखर की मौत हो चुकी थी।

-कोटा जाने के बाद शव को डिक्की में डाल दिया। यह गाड़ी अपने घर के बाहर खड़ी कर 31 दिसंबर की रात 12 बजे घर जाकर सो गया।
1 जनवरी को कार को कोटा में खड़ी कर बस से जयपुर चला गया। वहां से शेखर के मोबाइल से उसके घर वालों के नंबर तलाशे। नहीं मिलने पर वापस कोटा आया।
बॉक्स


ऐसे लगाया ठिकाने

1 जनवरी को भाटी वापस कोटा आ गया। शेखर के शव को अपने फार्म हाउस पर जलाना चाहा लेकिन केरोसिन कम था। अधजला शव बोरों में डाल नांता नहर में फेंक दिया था। दो जनवरी को बूंदी रोड पर शेखर का फोन ऑन कर घरवालों से एक करोड़ रुपए और पांच किलो सोना मांगा। फिरौती नहीं मिलने पर शेखर का पार्सल भिजवाने की बात कही। उदयपुर में 3 जनवरी को रेलवे स्टेशन पर मिलने को कहा। उदयपुर में दो दिन रहकर संपर्क में रहा।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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