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मेवाड़ में है शैल चित्रों की सबसे लंबी श्रंखला
श्रीकृष्ण जुगनू
| Apr 16, 2012, 07:31AM IST

बूंदी निवासी कुक्की किराणा की दुकान चलाते हैं, साथ ही पुरास्थलों की खोज में लगे रहते हैं। उन्होंने पहली बार 1978 में सिक्कों और रंगीन पत्थरों की खोज से पुरान्वेषण का सिलसिला आरंभ किया था। अब तक उन्होंने भीलवाड़ा, बूंदी जिलों में 84 शैल चित्रों की श्रंखलाएं खोज निकाली हैं। इनमें से बिजौलिया से बांकी तक लगभग 35 किलोमीटर लंबी शैल चित्रों की श्रंखला है। इसमें गेरू, हिरमिच, कत्थई, लाल, नारंगी जैसे रंगों के अतिरिक्त हरे रंग का भी प्रयोग मिलता है, जो बहुत ही दुर्लभ है। कारण कि हरा रंग कैसे बनाया और प्रयोग किया जाता था यह अब तक अज्ञात है।
ये भी खोजा
मेवाड़ में भीलवाड़ा जिले के गोविंदपुरा गांव के पास शिलाश्रयों में पहली बार स्त्री-पुरुष के आलिंगनबद्ध चित्र भी खोजे गए हैं और ये चित्र चार की संख्या में खोजे गए हैं। बांका (मांडलगढ़) में उन्होंने सजावटी शैलाश्रयों को भी खोजा है, जिनमें अंगुलियों के पोरों से छींट जैसी सज्जा की गई है। मोई का सूंडा (भीलवाड़ा) में शेर और बब्बर शेर के चित्र भी खोजे हैं। ये एक ऐसे द्वार के दोनों ओर बने हैं, जो संभवत: सिंहद्वार का पहला नायाब नमूना है। कुक्की मानते हैं कि उदयपुर अंचल में भी शैलाश्रयों की खोज की जानी चाहिए।इसके लिए गंभीर सर्वेक्षण अपेक्षित है।





