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निजी स्कूलों को पढ़ाया आरटीई का पाठ

 
Source: Bhaskar News   |   Last Updated 05:17(01/02/12)
 
 
 
 
अजमेर.नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 का पाठ पढ़ाने के बाद अब निजी स्कूल प्रबंधकों की प्रशासन ने आंखें खोल दी हैं। बच्चों के प्रवेश के नाम पर मनमानी और बच्चों व अभिभावकों के इंटरव्यू लिए जाने की परंपरा अब नहीं चल पाएगी। अधिनियम का उल्लंघन करने वाले स्कूलों की अब खैर नहीं होगी।

जिला प्रमुख सुशील कंवर पलाड़ा, सहायक कलेक्टर भगवत सिंह राठौड़, आरटीई अधिकारी राजेश तिवारी समेत शिक्षा अधिकारियों ने स्कूल प्रबंधकों को चेताया है कि अधिनियम की सख्ती से पालना कराई जाएगी और कोताही बरतने पर बख्शा नहीं जाएगा। जिला परिषद के सभागार में आयोजित कार्यशाला में मुख्य फोकस आरटीई की पालना ही था।

कार्यशाला में दूसरा दशक के निदेशक प्रिंस सलीम ने प्रोजेक्टर से अधिनियम के बारे में जानकारी दी। उन्होंने इस अधिनियम को आंदोलन स्वरूप देने का आह्वान करते हुए कहा कि देशभर में अभी साढ़े 5 लाख शिक्षकों के पद रिक्त हैं। अधिनियम की मंशा के मुताबिक करीब साढ़े 6 लाख शिक्षकों के पर जल्द ही भरने की कवायद की जाएगी।

सभी स्कूलों को मान्यता लेना अनिवार्य है। बिना मान्यता स्कूल चलाने पर 10 हजार का जुर्माना होगा। जुर्माने के बावजूद स्कूल को चालू रखा तो 10 हजार रुपए प्रतिदिन जुर्माना वसूला जाएगा।


सहायक कलेक्टर (मुख्यालय) भगवत सिंह राठौड़ ने स्कूलों की प्रवेश नीति से लेकर बच्चों को लाटरी के जरिए प्रवेश देने और अधिनियम की धाराओं के बारे में बताया। एसीईओ सुरेश कुमार सिंधी ने कहा कि जब वे अजमेर में तहसीलदार थे तब निजी स्कूलों ने उनके बच्चों को प्रवेश देने में आनाकानी की थी।

अब अधिनियम के तहत गरीब बच्चों का क्या होगा? डॉ. सुभाष मंगल ने स्पष्ट किया कि जिन निजी स्कूलों को सरकार से कम राशि में जमीन मिली हुई है उन्हें बच्चों की राशि रिफंड नहीं की जाएगी।

अल्पसंख्यक संस्थाओं में भी आरटीई लागू रहेगा। आरटीई अधिकारी राजेश तिवारी ने निजी स्कूल प्रबंधकों को सामाजिक दायित्वों की याद दिलाते हुए कहा कि गरीब तबके के 25 प्रतिशत बच्चों की फीस का पुनर्भरण सरकार करेगी।

उन्होंने सभी सरकारी स्कूलों के खेल मैदानों को अतिक्रमण मुक्त कराने का सुझाव दिया। एसएसए के अति. जिला समन्वयक महावीर सिंह राठौड़ ने एसएसए की गतिविधियों पर प्रकाश डाला।

अधिनियम का पाठ पढ़ाने से निजी स्कूलों के प्रबंधकों के सामने यह भी साफ हो गया कि अगर किसी स्कूल में एलकेजी व पहली कक्षा के बजाय चौथी कक्षा से शुरुआत हो तो उन्हें कक्षा 4 में गरीब बच्चों को प्रवेश देना होगा। अधिनियम की एक पुस्तिका भी बांटी गई। कुछ प्रबंधकों ने सवाल भी किए।

प्राइवेट स्कूल यूनियन के अध्यक्ष कैलाश शर्मा ने कहा कि वे आरटीई की पालना करेंगे और इस कार्यशाला से हमें काफी सीखने को मिला है। लेकिन मुख्यमंत्री की प्रति बच्चे पर प्रति वर्ष साढ़े 8 हजार देने की घोषणा पर कायम रहना होगा।

जिला प्रमुख पलाड़ा के अलावा शिक्षा समिति के अध्यक्ष नंदाराम चौधरी, सीईओ रामपाल शर्मा, डीईओ रामचंद्र सामंत समेत अन्य अधिकारी और 300 स्कूलों के प्रबंधक व प्रधानाध्यापक मौजूद थे।


क्या कहता है कानून

> धारा 2(सी)- बच्चा का अर्थ है 6 से 14 वर्ष का स्त्री या पुरुष बच्चा।

> धारा 2(एफ)- प्रारंभिक शिक्षा से तात्पर्य है पहली कक्षा से 8वीं कक्षा तक की शिक्षा।


> धारा 2(ओ)- चयन प्रक्रिया से तात्पर्य स्कूल में बच्चों के नामांकन के लिए किसी बच्चे को चुनने के लिए अपनाए जाने वाली प्रक्रिया से है जो क्रम रहित (रेंडम) यानि लाटरी है।

> धारा 12(1)सी- स्कूल की कक्षा एक की कुल छात्र संख्या का 25 प्रतिशत पड़ोस के गरीब व कमजोर बच्चे होंगे जिन्हें मुफ्त व अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक दी जाएगी। यदि स्कूल में पूर्व शिक्षा एलकेजी है तो स्कूल पूर्व शिक्षा पर भी यह नियम लागू होंगे।

> धारा 13(1)- कोई स्कूल या व्यक्ति बच्चे को दाखिला देते समय एडमिशन फीस नहीं लेगा और ना ही बच्चे या उसके माता-पिता या अभिभावक को चयन की प्रक्रिया के लिए बाध्य नहीं करेगा।


> धारा 13(2)ब- बच्चे को चयन प्रक्रिया के लिए बाध्य करता है तो पहली गलती पर 25 हजार रुपए का जुर्माना भरना होगा और बाद में प्रत्येक गलती पर 50 हजार का जुर्माना देना होगा।
प्रवेश नीति बनाए

> प्रवेश प्रक्रिया के तहत स्कूलों को प्रवेश नीति बनानी होगी और कक्षा एक से लेकर आठ तक के 6 से 14 वर्ष के बच्चों को लाटरी के जरिये ही प्रवेश देना होगा।

> कक्षा एक अथवा पूर्व प्राथमिक कक्षा (जैसी स्थिति हो) में विद्यालय की सीटों की संख्या का 25 प्रतिशत सीटों पर राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित असुविधा ग्रस्त समूह एवं कमजोर वर्ग के बालकों को प्रवेश देना होगा।

यह रहेगा क्षेत्र

> नियमों के नियम 10 के अनुसार निजी विद्यालयों में प्रवेश के लिए ग्रामीण क्षेत्र विद्यालय की संबंधित ग्राम पंचायत एवं शहरी क्षेत्र में स्थित विद्यालयों के लिए संबंधित नगर निगम/नगर परिषद/नगरपालिका का क्षेत्र निर्धारित किया गया है।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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