सावधानी से करें फ्री वाई-फाई का यूज
Source: dainikbhaskar.com | Last Updated 09:22(06/02/12)
फ्री पब्लिक वाई-फाई नेटवर्क का इस्तेमाल पूरी सावधानी बरतते हुए करें। ऐसा न करने पर कंटेंट चोरी भी हो सकता है। ऐसा आपके साथ न हो इसके लिए कुछ बातें हमेशा ध्यान में रखें।
सिक्योर हो नेटवर्क
अगर आप बिना किसी सेफ्टी फीचर के वाई-फाई का फ्री पब्लिक हॉट-स्पॉट यूज करते हैं तो यह खतरनाक साबित हो सकता है। हालांकि इसमें 'सिक्योरिटी की' भी उपलब्ध कराई जाती है, जिसके जरिए यूजर बाहरी फ्रीलोडर्स से बच जाते हैं। इसका फायदा यह भी होता है कि कोई भी आपके वाई-फाई से कनेक्ट नहीं हो पाता। इसलिए अगर आप इस तरह के सिक्योरिटी सिस्टम का सहारा लेते हैं, तो आपके पर्सनल डाटा के सुरक्षित बने रहने के चांस बढ़ जाते हैं। आजकल यह भी देखने में आ रहा है कि पब्लिक एरिया में कुछ फालतू हॉट-स्पॉट भी काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। जैसे कि 'बीटी ओपनजोन' बिना वजह आपको अपने साथ कनेक्ट कर लेता है। एक बार जब आपकी डिवाइस इस तरह के नेटवर्क से जुड़ जाती है तो उसके डेवलेपर से आपका कंटेंट बचना मुश्किल है। इसलिए इस तरह के नेटवर्क से बचने की कोशिश करें और फ्री वाई-फाई नेटवर्क यूज करने से पहले उसका नाम जरूर चेक कर लें।
हममें से तमाम लोग लैपटॉप, टैबलेट या स्मार्टफोन को फ्री पब्लिक वाई-फाई नेटवर्क से कनेक्ट करते हैं, जबकि यह खतरनाक भी हो सकता है। हैकर्स इसके सहारे आपके वेबसाइट लॉग-इन से डिटेल पता कर सकते हैं। हालांकि, ऐसा तभी संभव होता है जब यूजर अनसेफ वाई-फाई से कनेक्ट रहे। और तो और, हैकर्स किसी एप्लीकेशन को मेलवेयर का शिकार दिखाकर स्मार्टफोन या टैबलेट से पर्सनल इंफॉर्मेशन भी चोरी कर सकते हैं। लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि हैकर्स के डर से फ्री पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल बंद कर दिया जाए। जरूरत कुछ सावधानियां बरतने की है, जिसके बाद बगैर किसी समस्या के फ्री वाई-फाई का इस्तेमाल किया जा सकता है।
सावधानी से करें इस्तेमाल
पिछले समय में स्मार्टफोन और टैबलेट में छिपे हुए एप्लीकेशंस के जरिए मेलवेयर में काफी बढ़ोत्तरी हुई है। हालांकि इस मामले में आईफोन और आईपैड यूजर्स कुछ भाग्यशाली रहे हैं। दरअसल, एप्पल का स्क्रीनिंग प्रोसेस बहुत स्ट्रिक्ट है, जो कि इस तरह के एप्लीकेशंस को एक्सेप्ट नहीं करता है। बावजूद इसके एप्पल यूजर्स को इस तरह की समस्या का सामना करना ही पड़ता है। देखने में आया है कि ऐसे मामलों में एंड्रॉयड यूजर्स को ज्यादा समस्या उठानी पड़ी है। दरअसल, इन डिवाइसेज में इस तरह के गलत एप्लीकेशंस बड़े पैमाने पर मिल जाते हैं। मसलन 'एंग्री बड्र्स' जैसे लोकप्रिय गेम्स डाउनलोड करते वक्त मेलवेयर यूजर के सिस्टम में एंट्री कर जाता है। इसलिए, बेहतर होगा कि जब भी वाई-फाई का इस्तेमाल करें, तो न्यू एप्प डाउनलोड करते वक्त सावधान रहें। वर्ना लेने के देने भी पड़ सकते हैं।
क्या है हल
विशेषज्ञों की मानें तो इस समस्या का बहुत ही साधारण हल यह है कि एवीजी एंटी वायरस टूल को डिवाइस में डाउनलोड कर लें। एवीजी एंटी वायरस टूल गैजट की सभी एप्लीकेशंस को स्कैन कर समय-समय पर यूजर को इंफॉर्म करता रहता है। इस तरह यूजर पहले ही अलर्ट हो जाता है और उनका गैजट मेलवेयर का शिकार होने से बच जाता है। यही नहीं, यह एंटी वायरस टूल एसएमएस मेलवेयर के जोखिम से भी बचाता है। इसके अलावा यूजर पासवर्ड डालकर ऐसे एप्लीकेशंस को लॉक भी कर सकते हैं, जिससे उनका डिवाइस हैकर्स से बचा रहेगा।
अपडेट करें सॉफ्टवेयर
आजकल स्मार्टफोन और टैबलेट निर्माता कंपनियां इसके फंक्शंस को इंप्रूव करती रहती हैं। मसलन अगर आपने कोई डिवाइस दो महीने पहले खरीदा है तो उसमें आज की तारीख में काफी बदलाव आ गए होंगे। इसलिए सावधानी इसी में है कि डिवाइस में सिक्योरिटी फीचर्स को अपडेट करते रहें, ताकि नए खतरों से बच सकें। हालांकि, स्मार्टफोन और टैबलेट अपने आप भी अपडेट होते रहते हैं। उदाहरण के तौर पर आईफोन और आईपैड में आईओएस-5 वर्जन का सॉफ्टवेयर उपलब्ध है। जब यूजर चीप वाई-फाई नेटवर्क से कनेक्ट होने लगते हैं, तो यह सॉफ्टवेयर इंफॉर्म कर देता है। अब एंड्रॉयड बस स्मार्टफोन और टैबलेट भी ऐसी सुविधा देने लगे हैं।