विज्ञापन
 

सावधान: नींद टूटने पर भी पड़ता है याददाश्त पर असर

BHASKAR | Jul 27, 2011, 09:40AM IST
 
 


चूहों पर हुए एक नए शोध का कहना है कि टूटी फूटी नींद याद्दाश्त को प्रभावित करती है.

अमरीका के स्टैनफ़र्ड विश्वविद्यालय में हुए शोध ने पाया कि ठीक से नींद न आने पर जानवरों को परिचित चीज़ें पहचानने में भी दिक्कत होती है.

ब्रिटेन के एक नींद विशेषज्ञ का कहना है कि मस्तिष्क गहरी नींद के दौरान दिन भर की घटनाओं की समीक्षा करता है और ये तय करता है कि किसका संचय किया जाए और किसका नहीं.

इस अध्ययन में ऑप्टोजेनेटिक्स नामकी तकनीक का इस्तेमाल किया गया जिसमें कुछ विशिष्ट कोशिकाओं को जीन संवर्द्धन से तैयार किया जाता है जिससे उन्हे प्रकाश से नियंत्रित किया जा सके.

चूहों पर स्मृति परीक्षण

शोधकर्ताओं ने चूहों के मस्तिष्क की उन कोशिकाओं को प्रकाश तरंगे भेजीं जो सोने और जागने की स्थितियों के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.

इसका मतलब ये हुआ कि उन्होने चूहों की नींद की समयावधि को प्रभावित किए बिना उसमें व्यवधान पैदा किया.

उसके बाद उन्हे एक डिब्बे में रखा गया जहां दो चीज़ें रखी थीं जिनमें से एक को वो पहले देख चुके थे.

आमतौर पर चूहे नई वस्तु को देखते परखते हैं.

हमने ये निष्कर्ष निकाला है कि इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि कोई कितनी देर तक सोए या कितनी गहरी नींद सोए लेकिन अच्छी याद्दाश्त के लिए बिना व्यवधान की नींद बहुत ज़रूरी है. डॉ लुई डि लेसिया, शोधकर्ता

जिन चूहों की नींद में कोई ख़लल नहीं डाला गया था वो नई वस्तु को देखने परखने लगे जबकि जिनकी नींद ख़राब की गई थी वो दोनों वस्तुओं को देखने परखने लगे.

इसका मतलब ये हुआ कि टूटी फूटी नींद की वजह से उन्हे पहले देखी वस्तु याद नहीं रही.

नींद और याद्दाश्त का गहरा संबंध

शोध का नेतृत्व करने वाले डॉ लुई डि लेसिया ने कहा, "कई रोगात्मक स्थितियों में जिनमें याद्दाश्त प्रभावित होती है जैसे अल्ज़ाइमर्स, ठीक से नींद नहीं आती".

टूटी फूटी नींद उन लोगों को भी प्रभावित करती है जो शराब के लती होते हैं या जो स्लीप एपनिया के शिकार होते हैं.

इसमें उनका गला सोते समय संकरा हो जाता है जिससे पूरी ऑक्सीजन भीतर नहीं पहुंच पाती और रोगी की नींद खुलती रहती है.

डॉ लेसिया ने कहा, "हमने ये निष्कर्ष निकाला है कि इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि कोई कितनी देर तक सोए या कितनी गहरी नींद सोए. लेकिन अच्छी याद्दाश्त के लिए बिना व्यवधान की नींद बहुत ज़रूरी है".

ब्रिटिश स्लीप सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष और नींद विशेषज्ञ डॉ नील स्टेन्ली कहते हैं,"दिन भर में हम सैकड़ों यादें इकट्ठी करते हैं इसलिए कभी न कभी उनकी छंटाई करनी पड़ती है".

"कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं जिन्हे स्थाई स्मृति में बंद करना पड़ता है". "ये प्रक्रिया गहरी नींद के समय ही होती है. इसलिए अगर नींद में व्यवधान होगा तो इस प्रक्रिया पर उसका असर पड़ेगा".

डॉ स्टेन्ली कहते हैं कि इस बात के प्रमाण हैं कि स्लीप एपनोइया से पीड़ित लोगों को स्मृतियों को क़ैद करने में परेशानी होती है. नींद में व्यवधान के कारण दिन में आदमी बहुत थकान महसूस करता है और याद्दाश्त खोने लगता है.

हमने ये निष्कर्ष निकाला है कि इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि कोई कितनी देर तक सोए या कितनी गहरी नींद सोए लेकिन अच्छी याद्दाश्त के लिए बिना व्यवधान की नींद बहुत ज़रूरी है.

डॉ लुई डि लेसिया, शोधकर्ता

 
 
 

आपके विचार
 
 
कोड:
7 + 3

 
Ad Link
विज्ञापन
विज्ञापन
 
 
 
 
Sabse Bada Match Fixer Contest
 
 

बड़ी खबरें

रोचक खबरें

विज्ञापन

बॉलीवुड

जीवन मंत्र

क्रिकेट

बिज़नेस

जोक्स

पसंदीदा खबरें

Email Print Comment
Email Print Comment