खेल डेस्क. चेतेश्वर पुजारा व मुरली विजय की रिकॉर्डतोड़ बैटिंग और भारतीय स्पिनर्स की कमाल गेंदबाजी के दम पर भारत ने ऑस्ट्रेलिया को हैदराबाद टेस्ट में 135 रन और पारी के अंतर से हराया। दोनों टीमों के इतिहास में यह भारत की यह दूसरी सबसे बड़ी जीत है।
इस जीत के साथ ही कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने पूर्व कप्तान सौरव गांगुली की 21 टेस्ट जीत के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया। अब वे 22 जीते हुए मैचों के साथ भारत के सबसे सफल टेस्ट कप्तान हैं।
रिकी पोंटिंग, मैथ्यू हेडन, माइक हसी, डेमियन मार्टिन और एडम गिलक्रिस्ट जैसे दिग्गजों की अहमियत आज कप्तान माइकल क्लार्क को समझ आ रही होगी। पिछले साल भारतीय टीम को 4-0 से हरा कर हीरो बनी क्लार्क एंड कंपनी हैदराबाद में महज तीसरे ही दिन अपनी हार तय करवा दी थी। चौथे दिन के पहले ही सत्र में मेजबान टीम के स्पिनर्स ने उसे पारी से हरा दिया।
पहले दिन भुवनेश्वर की स्विंग और रवींद्र जडेजा व आर अश्विन की स्पिन ने कंगारुओं को महज 237 रन पर रोक दिया। खुद को होशियार साबित करने के लिए कप्तान क्लार्क ने अपनी पारी को 9वां विकेट गिरते ही डिक्लेयर कर दिया। उन्हें लगा कि उनके गेंदबाज भी भारतीय ओपनर्स को सस्ते में चलता कर मैच में टीम की वापसी करवा देंगे, लेकिन उनका प्लान पूरी तरह फ्लॉप हो गया।
हालांकि, वीरेंद्र सहवाग के सस्ते में आउट होने के बाद ऐसा लग रहा था कि क्लार्क की शातिर चाल काम कर जाएगी, लेकिन एक बार जब पिच पर चेतेश्वर पुजारा और मुरली विजय की जोड़ी जमी तो जैसे मैच का पासा ही पलट गया। रविवार के दिन भारतीय टीम ने महज 1 विकेट के नुकसान पर 311 रन बनाए। तीसरे दिन इस स्कोर को विशाल बनाते हुए मेजबान बल्लेबाजों ने 503 रन बनाए।
एक छोर से इंडियन बैट्समैन रन ठोक कर रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बना रहे थे, तो दूसरे छोर पर कंगारू गेंदबाज पानी-पानी (विकेट-विकेट) कर रहे थे। निजामों की नगरी में डंका मेजबान टीम का ही बजा।
टेस्ट इतिहास में ऑस्ट्रेलिया के नाम सर्वाधिक 353 जीत दर्ज हैं, जिसमें से 85 बार कंगारुओं ने पारी के अंतर से जीत हासिल की है। इसके बावजूद, हैदराबाद के मैदान पर उसे टेस्ट में 14वीं सबसे शर्मनाक हार झेलनी पड़ी।
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