खेल डेस्क. इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज के पहले तीन मैचों के लिए घोषित टीम इंडिया ने फैन्स के अंदर गुस्सा भर दिया है। स्टार ओपनर वीरेंद्र सहवाग को खराब फॉर्म के आधार पर जहां बाहर का रास्ता दिखाया गया, वहीं पिछली 15 पारियों से फ्लॉप हो रहे रोहित शर्मा को विकल्पों के अभाव का हवाला देते हुए बरकरार रखा गया।
dainikbhaskar.com ने अपनी रिपोर्ट (
EXPOSED: धोनी ने सात युवा खिलाडि़यों के साथ किया अन्याय!) में उन खिलाड़ियों के नाम उजागर किए जो कि नेशनल टीम का हिस्सा हो सकते थे। फ्लॉप रोहित के स्थान पर शिखर धवन, मुकुल डागर और जीवनजोत सिंह जैसे युवाओं को शामिल किया जा सकता था, लेकिन टीम के अंदर चल रही खींचतान के चलते इनके नामों पर विचार तक नहीं किया गया।
भारतीय क्रिकेट की यह कहानी कोई नयी नहीं है। इससे पहले भी कई प्रतिभावान खिलाड़ियों के करियर चौपट हो चुके हैं। देश के सबसे प्रतिष्ठित घरेलू क्रिकेट टूर्नामेंट रणजी में शानदार परफॉर्मेंस के बावजूद खिलाड़ियों को बाहर रखा जाता है। अमोल मजूमदार, दीपक शोधन कुछ ऐसा नाम हैं जो कि रणजी के स्टार बन कर ही रह गए। इन्हें टीम में आने का मौका कभी मिल ही नहीं सका।
मौजूदा टीम इंडिया में अकसर कप्तानी को लेकर महेंद्र सिंह धोनी और वीरेंद्र सहवाग के बीच खींचतान की खबरें आती रहती हैं। पॉवर के लिए टीम में गुटों का बनना आम बात है, लेकिन क्या आप जानते हैं ऐसी गुटबाजी टेलेंटेड खिलाड़ियों की प्रतिभा का गला घोंट देती है?
भारतीय क्रिकेट में एक समय ऐसा भी था जब दो सीनियर खिलाड़ियों के बीच कप्तानी को लेकर हुए झगड़े ने एक प्रतिभावान क्रिकेटर का करियर तबाह कर दिया था।
वह दुर्भाग्यशाली खिलाड़ी थे अहमदाबाद के दीपक शोधन। इस गुजराती खब्बू बल्लेबाज ने अपने करियर की शुरुआत बहुत कठिन हालातों में की थी। बेहतरीन आगाज के बावजूद उन्हें महज 3 टेस्ट मैच खेलने का मौका मिल सका।
इसके पीछे कारण उनमें टेलेंट की कमी नहीं, बल्कि भारतीय टीम में कप्तानी को लेकर चल रही लड़ाई थी।
आगे क्लिक कर जानिए, कैसे भारतीय क्रिकेट में हुआ है टेलेंट का कत्ल, एक कड़वी सच्चाई...