6 जुलाई 2008, कराची में भारत और श्रीलंका के बीच एशिया कप का फाइनल। श्रीलंका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए सनथ जयसूर्या के शानदार शतक की बदौलत 273 रनों का स्कोर खड़ा किया था।
टीम इंडिया ने भी विस्फोटक अंदाज में पारी की शुरुआत करते हुए गंभीर का विकेट खोकर 9 ओवर्स में 70 रन बना लिए थे। इस समय केवल 36 गेंदों पर 60 रन बना चुके वीरेंद्र सहवाग के सामने एक नए नवेले स्पिनर को बॉलिंग के लिए लाया गया।
दूसरी ही गेंद पर इस युवा स्पिनर ने सहवाग को संगकारा के हाथों स्टम्प करा श्रीलंका को विकेट दिला दिया। सहवाग को आउट करने के दो गेंदों बाद ही उसने युवराज सिंह को क्लीन बोल्ड कर भारतीय खेमें में सनसनी फैला दी।
इस युवा का कहर यहीं नहीं रुका अगले ओवर्स में उसने सुरेश रैना, रोहित शर्मा, इरफान पठान और आरपी सिंह को भी पवेलियन भेज टीम इंडिया का पुलिंदा बांध दिया। मैच खत्म होने तक इस स्पिन गेंदबाज ने आठ ओवर्स में केवल 13 रन देकर टीम इंडिया के छह विकेट ले डाले। इस प्रदर्शन के दम पर लंका ने एशिया कप 100 रन से जीत लिया।
ये युवा गेंदबाज था अंजथा मैंडिस। इस प्रदर्शन के कारण मैंडिस को मैन ऑफ द फाइनल चुना गया। अपनी जादुई स्पिन से एशिया कप के पांच मैचों में 18 विकेट लेने मैंडिस मैन ऑफ द सीरीज भी चुने गए।
अंजथा मैंडिस आज (11 मार्च) को अपना जन्मदिन मना रहे हैं। मैंडिस की स्पिन मिस्ट्री को समझना बल्लेबाजों के लिए मुश्किल हो गया था।
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