खेल डेस्क. कहते हैं एक इंसान के कैरेक्टर की पहचान बुरे समय में होती है। चारों ओर से आलोचकों के बाउंसर झेल रहे टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने पाकिस्तान के खिलाफ शतक लगा कर कुछ ऐसा ही कारनामा कर दिखाया। उनका जुझारूपन देख कर चेन्नई की जनता के साथ-साथ प्रतिद्वंद्वी टीम पाकिस्तान भी नतमस्तक हो गई। आलम कुछ ऐसा रहा कि भारतीय पारी की आखिरी गेंद पर रन आउट का चांस होने के बावजूद मेहमान टीम के फील्डरों ने गेंद थ्रो नहीं की।
बयानों के जरिए यदाकदा अपनी हेकड़ी दिखाने वाले वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर के बल्ले पाकिस्तान के खिलाफ चेन्नई में हुए पहले वनडे मैच में शांत रहे। सहवाग ने पारी के पहले ओवर में चौका जरूर लगाया, लेकिन जल्द ही वे क्लीन बोल्ड हो कर अपना विकेट गंवा बैठे।
दूसरे छोर पर खड़े गौतम गंभीर जैसे साथी वीरू की विदाई का ही इंतजार कर रहे थे। उन्होंने भी 17 गेंदों के संघर्ष के बाद महज 8 रन बना कर पवेलियन लौटने का फैसला कर लिया। अगले ओवर में वे मोहम्मद इरफान की गेंद पर क्लीन बोल्ड हुए।
भारतीय बल्लेबाजों ने टेस्ट का खराब फॉर्म जैसे वनडे में भी जारी रखा। पहले पांच विकेट महज 29 रन के योग पर गिर चुके थे। एक हफ्ते पहले 23 साल के हुए जुनैद खान की गेंदबाजी से मेजबान टीम के बल्लेबाज खौफ खा गए। एक-एक कर टॉप ऑर्डर के पांच बल्लेबाज आउट हो कर पवेलियन लौट गए।
ऐसे मुश्किल समय में मोर्चा संभाला कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने।
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