खेल डेस्क. इंडियन क्रिकेट टीम के सितारों को देश के बच्चे अपना आदर्श मानते हैं। सचिन तेंडुलकर, महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली और वीरेंद्र सहवाग जैसे सितारों को यूथ आईकन के तौर पर देखा जाता है। लेकिन क्या ये सितारे इस लायक हैं? इस बात पर आज एक सवाल खड़ा हो गया है।
गत रविवार 16 तारीख को दिल्ली की एक मेडिकल स्टूडेंट के साथ चलती बस में कुछ सिरफिरों ने सामूहिक बलात्कार किया। उन हैवानों की दरिंदगी रेप तक ही सीमित नहीं रही। उन्होंने लोहे की रॉड से उस लड़की को इतना पीटा कि अब वह जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। दिल्ली की सड़कें कभी नहीं सोतीं, लेकिन उसके बावजूद जब उस महिला के साथ यह ज्यादती हो रही थी, तब सभी सोए रह गए। वह बस तीन पीसीआर वैन के सामने से गुजरी, लेकिन किसी ने अंदर की हलचल को महसूस नहीं किया।
इस घटना से पूरा देश स्तब्ध है। हर शहर में उस पीड़िता के समर्थन और उन दरिंदों को मौत की सजा देने की अपील करने के लिए प्रोटेस्ट मार्च हो रहे हैं। ऑनलाइन पिटिशन के जरिए उन्हें कड़ी सजा दिलाने की मुहिम चलाई जा रही है, लेकिन शायद भारतीय क्रिकेट टीम के सितारों को इसकी परवाह नहीं।
पुणे में इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 मैच के बाद युवराज सिंह मानवता दिखाते हुए मैन ऑफ द मैच का अवार्ड उस पीड़िता को समर्पित किया। युवी ने अपनी टीम का नाम जरूर लिया, लेकिन हैरत की बात यह थी कि कप्तान महेंद्र सिंह धोनी इस विषय पर बिल्कुल चुप रहे। जैसे उन्हें इस मुद्दे से कोई लेना देना ही नहीं था।
हर छोटी-बड़ी बात पर सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर चहकने वाले सितारे इस गंभीर मुद्दे पर शांत रहे। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इन्हें यूथ आईकन कहना सही है?
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